नौकरी बदलने पर तुरंत न निकालें PF का पैसा, होते हैं ये नुकसान

प्राइवेट सेक्टर में नौकरियां बदलना बेहद आम है। लेकिन हर बार नौकरी बदलने के बाद एंप्लॉयी प्रोविडेंट फंड (EPF) निकाल लेना सही फैसला नहीं है।

अपडेटेड Jul 04, 2021 पर 11:28 AM
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प्राइवेट सेक्टर में नौकरियां बदलना बेहद आम है लेकिन हर बार नौकरी बदलने के बाद एंप्लॉयी प्रोविडेंट फंड (EPF) निकाल लेना सही फैसला नहीं है। नौकरी बदलने पर EPF का पैसा निकालने के बजाय अपना EPF और एंप्लॉयीज पेंशन स्कीम (EPS) का पैसा नए EPF अकाउंट में ट्रांसफर करवा लेना चाहिए।


कितना देना होगा टैक्स?


अगर आप कॉन्ट्रिब्यूशन के 5 साल पूरा होने से पहले EPF का पूरा पैसा निकाल लेते हैं तो टैक्स बेनेफिट भी खत्म हो जाएगा। यानी EPF में कॉन्ट्रिब्यूशन पर इनकम टैक्स के सेक्शन 80 C के तहत जो कर छूट मिला होगा, वह भी खत्म हो जाएगा। हालांकि अगर आप एक EPF अकाउंट से दूसरे EPF अकाउंट में ट्रांसफर करते हैं तो टैक्स छुट का फायदा रिवर्स नहीं होगा।


पेंशन बेनेफिट


EPS मेंबर अगर 10 साल का कॉन्ट्रिब्यूशन पूरा कर लेता है तो 58 साल की उम्र के बाद उसे पेंशन मिलता है। अगर कोई व्यक्ति 58 साल की उम्र से पहले ही रिटायर हो जाता है और EPS में 10 साल का कॉन्ट्रिब्यूशन है तो उसे भी पेंशन मिलता है।


कैसे कैलकुलेट करें EPFO पेंशन?



EPFO मेंबर के पेंशन का कैलकुलेशन ऐसे कर सकते हैं।
मंथली पेंशन = (सैलरी में पेंशन का हिस्सा X नौकरी के साल)/70


जिन लोगों ने 16 नवंबर 1995 के बाद नौकरी ज्वाइन किया है आपके लिए पेंशनेबल सैलरी EPS कॉन्ट्रिब्यूशन बंद करने से पहले के 60 महीनों का औसत होगा। फिलहाल मैक्सिमम पेंशनेबल सैलरी 15,000 रुपए महीना है। 


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