AIIMS की स्टडी में पाया गया है कि देश के कई वर्गों में अलग अलग परिस्थिति के हिसाब से 10 से 80 फीसदी विटामिन D की कमी है। शरीर के लिए विटामिन D कितना जरूरी है। उसकी कमी होने से शरीर पर क्या असर पड़ सकता है इन सभी सवालों का जवाब दिया है AIIMS मेटाबोलिज्म डिपार्टमेंट के HD प्रोफेसर आर गोस्वामी जिन्होंने विटामिन D डेफिसिएन्सी पर स्टडी की है।
आफिस वर्केर्स में विटामिन D की कमी ज्यादा
प्रोफेसर आर गोस्वामी ने कहा कि हमारे लिए विटामिन D जरूरी है। लेकिन भारतीयों में विटामिन D की कमी बढ़ रही है। बच्चों, बुजुर्गों और महिलाओं में भी इसकी कमी है। AIIMS की स्टडी में खुलासा हुआ है कि लोगों में 10-80 फीसदी तक विटामिन D की कमी है। आफिस वर्केर्स में विटामिन D की कमी ज्यादा है। बच्चों में 20-30 फीसदी विटामिन D की कमी है। विटामिन D की मात्रा 12-30ng/ml के बीच होनी चाहिए। इसकी कमी से ऑस्टियोपोरोसिस, कम हाइट और फ्रैक्चर का रिस्क रहता है। किडनी में एक्टिव विटामिन D बनते हैं।
डॉक्टर्स की सलाह है कि विटामिन डी की जरूरत पूरा करने के लिए अंडे और फैटी फिश लेना ही पर्याप्त नहीं है। इसके लिए रोजाना 15-20 मिनट डायरेक्ट धूप लेना जरूरी है। 1 महीने में 60,000 यूनिट विटामिन D जरूर लेना चाहिए। इसके लिए कॉलेकैल्सिफेरॉल (CHOLECALCIFEROL) का सेवन कर सकते हैं। विटामिन डी की पर्याप्त मात्रा लेने से हाईट अच्छी रहेगी, ओस्टियोपोरिसिस का रिस्क कम होगा और बोन पेन से भी निजात मिलती है।
विटामिन डी के लिए क्या खाएं
धूप के संपर्क में आने पर हमारी त्वचा में विटामिन-D बनता है। लेकिन व्यायाम और शारीरिक श्रम रहित लाइफस्टाइल, प्रदूषित हवा और इंडोर वर्कस्पेस बढ़ने की वजह से अब बहुत से लोगों में विटामिन-D की कमी की समस्या बढ़ी है। हमें जिन खाद्य स्रोतों से विटामिन-D मिलता है, वे काफी सीमित हैं। सबसे अच्छे स्रोतों में फैटी फिश और फिश लिवर ऑयल हैं, कुछ मात्रा अंडों की जर्दी में और कुछ हद तक मशरूम में भी मिलती है। शरीर में विटामिन-D की कमी से बचने के लिए न्यूट्रिशनल सप्लीमेंट्स लेने की सलाह दी जाती है।