डायबिटीज के मरीजों को सबसे ज्यादा अगर किसी चीज से दिक्कत होती है, तो वो है चावल की मनाही से। इस बीमारी में चावल, खासतौर से सफेद चावल (व्हाइट राइस) से दूर रहने की सलाह दी जाती है। इससे ब्लड शुगर, वजन और कोलेस्ट्रोल बढ़ने का खतरा रहता है। मगर क्या करें, पूरी दुनिया में चावल के चाहने वालों की संख्या अच्छी खासी है। मोटेतौर पर दुनिया की लगभग आधी आबादी चावल का सेवन करती है। ऐसे में चावल पर ही प्रतिबंध लग जाए तो क्या किया जाए ?
विशेषज्ञों ने किनोआ को इसका विकल्प बताते हुए इसके सेवन की सलाह दे रहे हैं। किनोआ खाने से सेहत को कई तरह के फायदे मिलते हैं। यह न सिर्फ चावल की तरह ही पकाने और खाने में आसान है, बल्कि पौष्टिकता के मामले में भी काफी बेहतर है। व्हाइट राइस के विकल्प के तौर पर इसका सेवन किया जा सकता है। आहार विशेषज्ञों का कहना है कि किनोआ में ब्राउन राइस के मुकाबले फाइबर, प्रोटीन, और जरूरी अमीनो एसिड ज्यादा मात्रा में होता है। इसलिए इसे खानपान में शामिल करना अच्छा फैसला हो सकता है।
क्यों बढ़ रहा है किनोआ की तरफ झुकाव
न्यूट्रिशन विशेषज्ञों की मानें तो किनोआ उन लोगों के लिए फायदेमंद होता है जिन्हें ग्लूटेन से एलर्जी है। इसमें ग्लूटेन नहीं होता है। इसके अलावा इसमें ट्राइग्लिसराइड और कोलेस्ट्रोल कम होता है। इसे खाने से वजन नियंत्रित करने में मदद मिलती है और दिल की सेहत भी दुरुस्त रहती है। इसका नियमित सेवन इम्युनिटी बढ़ाता है और एनिमिया और हड्डियों की कमजोरी दूर करने में भी मदद करता है। साथ ही ब्लड शुगर को भी नियंत्रित करता है।
डायबिटीज के मरीजों के लिए अच्छा
किनोआ में कैल्शियम, आयरन, पोटैशियम, मैग्नीशियम, मैंगनीज और फॉसफोरस जैसे जरूरी मिनरल्स अच्छी मात्रा में होते हैं। इसमें कुछ विशेष फाइटोकेमिकल्स भी होते हैं जो एनीमिया की रोकथाम, कोलेस्ट्रॉल नियंत्रित करते हैं, ब्लड शुगर कंट्रोल करने के साथ ही हड्डियों को भी मजबूत बनाते हैं।