आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में नींद सबसे ज्यादा प्रभावित हो रही है। लोग देर रात तक जागते हैं, स्क्रीन टाइम ज्यादा हो गया है और सोने का कोई तय समय नहीं रह गया है। ऐसे में कई बार नींद पूरी नहीं होती या फिर बहुत ज्यादा नींद हो जाती है। एक्सपर्ट्स के अनुसार, एक यंग व्यक्ति के लिए 7 से 8 घंटे की नींद जरूरी मानी जाती है। लेकिन सिर्फ घंटों का हिसाब ही काफी नहीं, बल्कि नींद का समय और उसकी गुणवत्ता भी उतनी ही अहम है।
कुछ अध्ययनों में यह सामने आया है कि जो लोग रोजाना 6 घंटे से कम सोते हैं, उनमें दिल से जुड़ी बीमारियों का खतरा काफी बढ़ जाता है। इससे शरीर में सूजन बढ़ सकती है, ब्लड प्रेशर नियंत्रित नहीं रहता और हृदय की मांसपेशियां कमजोर हो सकती हैं। वहीं अगर कोई रोजाना 9 घंटे से ज्यादा सो रहा है, तो यह भी नुकसानदायक हो सकता है। लंबे समय तक ज्यादा नींद लेने वालों में भी दिल की बीमारी, डायबिटीज और मोटापे का खतरा देखा गया है।
अनियमित सोने-जागने की आदतें यानी हर दिन अलग-अलग समय पर सोना और उठना भी शरीर की प्राकृतिक घड़ी को गड़बड़ा देती हैं। इससे हार्मोन असंतुलन हो सकता है और ब्लड प्रेशर और कोलेस्ट्रॉल का स्तर प्रभावित होता है। कुछ स्टडीज में ये भी पाया गया है कि जिन लोगों की नींद का पैटर्न अस्थिर होता है, उनमें दिल का दौरा या स्ट्रोक का खतरा बढ़ सकता है।
इसलिए जरूरी है कि लोग नींद को भी अपने जीवन की प्राथमिकता बनाएं। सोने और उठने का समय तय करें, सोने से पहले मोबाइल या टीवी से दूरी बनाएं और शांत वातावरण में नींद लें। याद रखें, नींद सिर्फ आराम के लिए नहीं, बल्कि आपके दिल की सेहत के लिए भी जरूरी है।