40 साल की उम्र के बाद खुद को स्वस्थ और ऊर्जावान बनाए रखना हर व्यक्ति की प्राथमिकता होती है। आमतौर पर लोग कार्डियो एक्सरसाइज जैसे दौड़ना, साइकिलिंग या वॉक पर ज्यादा ध्यान देते हैं क्योंकि ये दिल और फेफड़ों के लिए अच्छी मानी जाती हैं। लेकिन अब एक्सपर्ट्स कह रहे हैं कि सिर्फ कार्डियो से काम नहीं चलेगा, इसके साथ स्ट्रेंथ ट्रेनिंग यानी वेट लिफ्टिंग और मसल्स बनाने वाले व्यायाम भी जरूरी हैं।
जीव विज्ञान की सच्चाई ये है कि 40 की उम्र पार करते ही हमारे शरीर में मांसपेशियों का घनत्व कम होने लगता है। खासकर महिलाओं में मेनोपॉज के बाद ये कमी और तेज हो जाती है। इस कमी से शरीर कमजोर, चलने-फिरने में दिक्कत और हड्डियों की कमजोरी जैसी परेशानियां बढ़ने लगती हैं। स्ट्रेंथ ट्रेनिंग सिर्फ मांसपेशियों की ताकत बढ़ाने का काम नहीं करती, बल्कि यह हड्डियों को भी मजबूत बनाती है और ऑस्टियोपोरोसिस का खतरा कम करती है।
डॉ. मार्क हाइमन और अन्य हेल्थ एक्सपर्ट्स ने बताया है कि मसल्स मजबूत होने पर न केवल उम्र बढ़ती है बल्कि समय से पहले मौत का खतरा भी घटता है। नियमित स्ट्रेंथ ट्रेनिंग से वजन नियंत्रित रहता है और शरीर का मेटाबॉलिज्म बेहतर होता है जिससे कैलोरी जलाना आसान हो जाता है। यह डिप्रेशन, हाई ब्लड प्रेशर, डायबिटीज और हृदय रोग जैसी पुरानी बीमारियों से लड़ने में भी मददगार है।
जब बात फिटनेस की आती है तो कार्डियो और स्ट्रेंथ दोनों की अपनी-अपनी भूमिका होती है। कार्डियो आपके हृदय की हालत सुधारता है, स्टैमिना बढ़ाता है और तेजी से कैलोरी जलाने में मदद करता है। जबकि स्ट्रेंथ ट्रेनिंग धीरे-धीरे शरीर को टोन करती है, मांसपेशियों के टूटने से रोकती है और आपकी बॉडी को मजबूत बनाती है।
फिटनेस एक्सपर्ट्स की सलाह है कि सप्ताह में 2 से 3 बार स्ट्रेंथ ट्रेनिंग जरूर करें, साथ में कार्डियो को भी अपनी रूटीन का हिस्सा रखें। इससे दिल और मांसपेशियां दोनों स्वस्थ रहेंगी और आप सक्रियता के साथ जीवन का आनंद उठा पाएंगे।