Cancer Detecting Test: बैग के भीतर फूंकने से पता चल जाएगा कैंसर है या नहीं, मेडिकल साइंस ने की तरक्की

Cancer Detecting Test: पूरी दुनिया में कैंसर के मरीज तेजी से बढ़ रहे हैं। हर साल लाखों लोगों की कैंसर से मौत हो रही है। जानकारों का मानना है कि अगर समय रहते कैंसर का पता चल जाए तो मृत्यु दर को कम किया जा सकता है। इस बीच एक रिसर्च में कहा गया है कि सिर्फ टेस्ट से तीन तरह के कैंसर की पहचान की जा सकती है

अपडेटेड Oct 06, 2024 पर 3:30 PM
Cancer Detecting Test: कैंसर रोग की पहचान के लिए मरीज को एक बैग में फूंकना होता है। फिर इससे सांस में मौजूद गुण-अवगुण की जांच की जाएगी।

दुनियाभर में तेजी से फैल रही बीमारियों में से एक कैंसर भी है। यह कई तरह का होता है। इसे जानलेव बीमारी कहा गया है। यह एक ऐसी बीमारी है, जिसमें कैंसर के लक्षण मिलने के बावजूद घनघोर टेस्ट के दौर से गुजरना होता है। इस टेस्ट में करीब एक महीने तक का समय लग जाता है और मरीज को दर्दनाक दौर से भी गुजरना पड़ता है। इस बीच कैंसर की खोज के लिए वैज्ञानिकों ने एक क्रांतिकारी खोज की है। जिसमें सिर्फ सांस लेकर बाहर निकालने से ही कैंसर जैसी घातक बीमारी का पता चल जाएगा। इस टेस्ट में एक नहीं बल्कि कई तरह के कैंसर के टेस्ट की पहचान की जा सकेगी।

कहने का मतलब ये हुआ कि सिर्फ एक टेस्ट से कई तरह के कैंसर की पहचान की जा सकेगी। द सन में छपी एक खबर के मुताबिक, साइंस, इनोवेशन एंड टेक्नोलॉजी के एक अधिकारी ने बताया कि यह टेस्ट काफी असरदार और किफायती होगा।

सिर्फ एक टेस्ट में कैंसर की पहचान


जानकारों का मानना है कि यह टेस्ट काफी कारगर साबित हो सकता है। इस टेस्ट में मरीज को बैग के भीतर फूंकने के लिए कहा जाता है। इसमें ऐसे ही फूंकने के लिए कहा जाता है जैसे पुलिस शराब पिए हुए लोगों का टेस्ट करते हैं। यह टेस्ट काफी सस्ता भी है और मरीज को भी दर्दनाक दौर से नहीं गुजरना पड़ेगा। मेडिकल से जुड़े जानकारों ने इस टेस्ट को बेहतर बताया है। इसे कैंसर की जांच में नई सफलता के तौर पर लिया जा रहा है। इस टेस्ट में रोगी की सांसों में मौजूद गुण-अवगुण की जांच की जाएगी। लिवर, पैंक्रियाटिक और एसोफैगल कैंसर की जांच इस टेस्ट के जरिए की जा सकती है।

80 फीसदी मरीजों की जान बचाई जा सकती है

दरअसल, बायॉप्सी की रिपोर्ट आने में करीब 20-25 दिन लग जाते हैं। इसके बाद डायग्नोसिस होने में देर की वजह से भारत में कैंसर का इलाज करने में मुश्किलों का सामना करना पड़ता है। कैंसर के ज्यादातर मामलों में सर्वाइवल रेट सिर्फ 20 फीसदी है। इसकी वजह ये है कि ज्यादातर मरीज उस वक्त डॉक्टर के पास पहुंचते हैं। जब उनका कैंसर एडवांस स्टेज में यानी तीसरे या चौथे स्टेज में पहुंच चुका होता है। ऐसे में अगर कैंसर का पता शुरुआत में ही चल जाए तो करीब 80 फीसदी मरीजों को बचाया जा सकता है।

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