घर में इस्तेमाल होने वाली ये चीजें बनी सकती हैं कैंसर की वजह! Cancer को मात देने वाली महिला ने बताया अपना अनुभव

सुजाना ने बताया कि ये बदलाव बहुत ही आसान और असरदार हैं। इनसे शरीर पर पड़ने वाला ज़हरीला बोझ कम करने में काफी मदद मिलती है। उनका मानना है कि ऐसे छोटे-छोटे बदलाव हमारी सेहत को बेहतर बनाने की दिशा में बड़ा कदम हो सकते हैं

अपडेटेड Apr 18, 2025 पर 10:36 PM
कैंसर दुनिया की सबसे तकलीफदेह बीमारियों में से एक है।

कैंसर दुनिया की सबसे तकलीफदेह बीमारियों में से एक है, जिसकी पहचान समय पर हो पाना, इलाज मिल पाना या इससे बचाव कर पाना कई बार बहुत मुश्किल होता है। कंटेंट क्रिएटर और कैंसर से जूझ चुकीं सुज़ाना डेमोर ने इस बारे में जागरूकता फैलाने की पहल की है। सुजाना को तब कैंसर का पता चला जब वह प्रेग्नेंट थीं। इसके बाद उन्होंने अपने घर में इस्तेमाल होने वाली उन चीज़ों की एक लिस्ट बनाई, जिनका अब वह कभी इस्तेमाल नहीं करेंगी।

Cancer को मात देने वाली महिला ने बताया अपना अनुभव

उन्होंने इंस्टाग्राम पर एक पोस्ट में बताया, “सच कहूं तो, 35 साल की उम्र में जब मैं गर्भवती थी और मुझे कैंसर का पता चला, तो मेरी आंखें खुल गईं। तब मुझे समझ आया कि हम रोज़ाना कितनी जहरीली चीज़ों के संपर्क में आते हैं। तनाव और हमारे आसपास का माहौल हमारे स्वास्थ्य को कितनी गहराई से प्रभावित करता है। इसी वजह से मैंने ऐसे कई प्रोडक्ट्स को बदल दिया, जो मेरे या मेरे परिवार के लिए सही नहीं थे।”


सुजाना ने बताया कि ये बदलाव बहुत ही आसान और असरदार हैं। इनसे शरीर पर पड़ने वाला ज़हरीला बोझ कम करने में काफी मदद मिलती है। उनका मानना है कि ऐसे छोटे-छोटे बदलाव हमारी सेहत को बेहतर बनाने की दिशा में बड़ा कदम हो सकते हैं। सुजाना के मुताबिक, अगर आप सच में अपनी सेहत को सबसे ज़रूरी मानते हैं और अपने शरीर में फिर से अच्छा और हल्का महसूस करना चाहते हैं, तो अब वक्त है छोटे लेकिन असरदार बदलाव करने का।

  • पारंपरिक डिओडोरेंट: इसे ऐसे सुरक्षित और बिना ज़हरीले तत्वों वाले विकल्प से बदलें, जो हार्मोन पर बुरा असर न डाले।
  • कपड़े धोने वाला ज़हरीला डिटर्जेंट और सफाई का सामान: इन्हें ऐसे आसान और सुरक्षित प्रोडक्ट से बदलें जिनमें नुकसानदायक केमिकल न हों, जो कैंसर जैसी बीमारियाँ पैदा कर सकते हैं।
  • फ्लोराइड टूथपेस्ट: मैंने अब ऐसा टूथपेस्ट इस्तेमाल करना शुरू किया है जिसमें फ्लोराइड, एसएलएस और पैराबेंस नहीं हैं। इसकी जगह इसमें हाइड्रॉक्सीपैटाइट (जो हमारे दाँतों के इनेमल का बड़ा हिस्सा होता है), प्रीबायोटिक्स और CoQ10 जैसे फायदेमंद तत्व होते हैं।
  • ज़हरीला शैम्पू: अब मैं ऐसा शैम्पू इस्तेमाल करती हूँ जिसमें पैराबेंस और कृत्रिम खुशबू नहीं होती।
  • केमिकल से भरा स्किनकेयर: अब मैं ऐसे स्किन प्रोडक्ट्स का इस्तेमाल करती हूँ जो बिना हानिकारक केमिकल्स के बने नहीं होते। ये प्रोडक्ट्स यूरोप के सख्त नियमों के अनुसार तैयार किए जाते हैं ताकि त्वचा को कोई नुकसान न हो।
  • ओवर-द-काउंटर (OTC) सप्लीमेंट्स: अब मैंने उनकी जगह ऐसे सप्लीमेंट्स लेने शुरू किए हैं जो अच्छी क्वालिटी के हों, जिन्हें शरीर आसानी से सोख सके। ये सप्लीमेंट्स माइक्रोब्स, भारी धातुओं, कीटनाशकों और हानिकारक केमिकल्स की जांच के बाद बनाए जाते हैं। इनमें चीनी, ग्लूटेन, नकली रंग या स्वाद नहीं होता और ये जीएमओ (जैविक रूप से बदले गए तत्वों) से भी मुक्त होते हैं।

डॉक्टर ने बताई ये बात

वहीं इसपर हैदराबाद के ग्लेनीगल्स हॉस्पिटल्स में क्रिटिकल केयर विभाग के प्रमुख और सलाहकार डॉ. मनेंद्र का कहना है कि, जब किसी को कम उम्र में कैंसर का पता चलता है, तो वह अपनी जीवनशैली पर दोबारा सोचने लगता है। डॉ. मनेंद्र ने बताया, "हालांकि हमारे स्वास्थ्य पर असर डालने वाले कई पर्यावरण और जीवनशैली से जुड़े कारण होते हैं, लेकिन अब लोग इस बात को लेकर जागरूक हो रहे हैं कि रोज़ाना इस्तेमाल होने वाले प्रोडक्ट्स में मौजूद जहरीले रसायनों का लंबे समय तक संपर्क हमारे शरीर पर बुरा असर डाल सकता है।"

पारंपरिक डिओडोरेंट्स में आमतौर पर एल्युमीनियम और कृत्रिम खुशबू वाले रसायन होते हैं। डॉ. मनेंद्र के मुताबिक, "ऐसे कई शोध चल रहे हैं जो यह जांच रहे हैं कि एल्युमीनियम हार्मोन के असंतुलन में क्या भूमिका निभा सकता है और इसका स्तन कैंसर से कोई संबंध है या नहीं।"

डॉ. मनेंद्र के मुताबिक, पारंपरिक सफाई प्रोडक्ट्स में अक्सर फथलेट्स, वीओसी (यानि वाष्पशील कार्बनिक तत्व) और कृत्रिम खुशबू वाले रसायन होते हैं, जिनमें से कुछ को कैंसर की वजह बनने वाले रसायनों की श्रेणी में रखा गया है। उन्होंने बताया, "ये रसायन कपड़ों में या घर की हवा में लंबे समय तक बने रह सकते हैं, जिससे सांस की जलन और भविष्य में सेहत को नुकसान पहुंचने का खतरा हो सकता है।"

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