कोरोना वायरस महामारी के बाद अब चांदीपुरा वायरस ने दस्तक दे दी है। इससे पूरे देश में हड़कंप मच गया है। स्वास्थ्य एजेंसियां अलर्ट हो गई हैं। गुजरात के साबरकांठा और अरवल्ली जिले में चार बच्चों की मौत से सन्नाटा पसर गया है। दावा किया जा रहा है कि इन चारों बच्चों की मौत चांदीपुरा वायरस से हुई है। इस वायरस से संक्रमित 2 बच्चों का इलाज भी चल रहा है। इन बच्चों का इलाज जिले के हिम्मतनगर के सिविल अस्पताल में चल रहा है। साबरकांठा के मुख्य जिला स्वास्थ्य अधिकारी राज सुतारिया ने बताया कि सभी बच्चों के खून के सैंपल पुष्टि के लिए पुणे स्थित राष्ट्रीय विषाणु विज्ञान संस्थान (National Institute of Virology for confirmation – NIV) भेजे गए हैं और उनके परिणाम का इंतजार है।
अधिकारी ने बताया कि हिम्मतनगर सिविल अस्पताल में बाल रोग विशेषज्ञों को 10 जुलाई को चार बच्चों की मौत के बाद चांदीपुरा वायरस hर संदेह हुआ था। सुतारिया ने कहा कि अस्पताल में भर्ती तीन अन्य बच्चों में भी इसी तरह के लक्षण दिखाई दिए हैं। ऐसा लगता है कि वे भी उसी वायरस से संक्रमित हैं। अब तक जिन चार बच्चों की मौत हुई है उनमें से एक साबरकांठा जिले का और दो पड़ोसी अरवल्ली जिले के थे। चौथा बच्चा राजस्थान का रहने वाला था।
दरअसल, साल 1966 में महाराष्ट्र के नागपुर स्थित चांदीपुर गांव में चांदीपुरा वायरस की पहचान हुई थी। इसके बाद इस वायरस को साल 2004-06 और 2019 में आंध्र प्रदेश, महाराष्ट्र और गुजरात में रिपोर्ट किया गया था। चांदीपुरा वायरस एक RNA वायरस है। यह वायरस सबसे अधिक मादा फ्लेबोटोमाइन मक्खी से ही फैलता है। मच्छर में एडीज ही इसके पीछे ज्यादातर जिम्मेदार है। 15 साल से कम उम्र के बच्चे सबसे ज्यादा इसका शिकार होते हैं। उन्हीं में मृत्यु दर भी सबसे ज्यादा रहती है। चांदीपुरा के इलाज के लिए आज तक कोई एंटी वायरल दवा नहीं बनी है। इस मैकेनिज्म में अगर दवा या वैक्सीन ईजाद की जाए तो चांदीपुरा वायरस फैलाने वाले रोग सोर्सेज पर कंट्रोल किया जा सकता है।
चांदीपुरा वायरस के लक्षण क्या हैं?
चांदीपुरा वायरस बुखार का कारण बनता है, जिसमें फ्लू के समान लक्षण होते हैं और तीव्र एन्सेफलाइटिस (मस्तिष्क की सूजन) होती है। रोगज़नक़ रबडोविरिडे परिवार के वेसिकुलोवायरस जीनस का एक सदस्य है।