Diabetes के मरीज कैसे करें चावल का सेवन? ये तरीका है बेहतर, ब्लड शुगर रहेगा डाउन

Diabetes: देश में डायबिटीज के मरीजों की संख्या तेजी से बढ़ रही है। उन्हें अपने खानपान में खास तौर से ध्यान देने की जरूरत रहती है। ऐसे में डायबिटीज के मरीजों को चावल बेहद सावधानी पूर्वक खाना चाहिए। सफेद चावल का ग्लाइसेमिक इंडेक्स हाई रहता है। ये कार्बोहाइड्रेट से भरपूर होते हैं। इससे ब्लड शुगर लेवल बढ़ सकता है

अपडेटेड Apr 15, 2024 पर 1:40 PM
डायबिटीज के मरीज अगर सीमित मात्रा में चावल खाएं तो उन्हें नुकसान नहीं होगा।

Diabetes: खराब लाइफस्टाइल के कारण डायबिटीज और हाई कोलेस्ट्रॉल जैसी समस्याएं देश में बढ़ती जा रही हैं। हालांकि खानपान और लाइफस्टाइल में बदलाव करके इन समस्याओं को कंट्रोल किया जा सकता है। वहीं डायबिटीज से पीड़ित मरीजों के सामने हमेशा खान पान की दिक्कत रहती है। उनके सामने यही समस्या रहती है कि आखिर क्या खाएं और क्या नहीं खाएं। बहुत से डायबिटीज के मरीज चावल खाने से डरते हैं। अगर आपके सामने भी यही समस्या है तो यह खबर आपके लिए बेहद अहम है। डायबिटीज से पीड़ित मरीज भी चावल खा सकते हैं। लेकिन सीमित मात्रा में इसका सेवन करना चाहिए।

सफेद चावल का ग्लाइसेमिक इंडेक्स काफी ज्यादा होता है। ये कार्बोहाइड्रेट से भरपूर होते हैं। इन्हें रोजाना अपनी डाइट में नहीं शामिल करना चाहिए। इससे ब्लड शुगर लेवल बढ़ सकता है। ऐसे में सवाल ये उठता है कि आखिर डायबिटीज के मरीजों को कौन से चावल का सेवन करना चाहिए।

डायबिटीज के मरीज ऐसे करें चावल का सेवन


अगर आपको डायबिटीज हो गई है या फिर आप शुगर होने की बॉर्डर लाइन पर हैं तो आपको हर दिन सफेद चावल खाने से बचना चाहिए। इनकी ब्राउन राइस का इस्तेमाल करना चाहिए। सफेद चावल के मुकाबले इसका ग्लाइसेमिक इंडेक्स बेहद कम होता है। इन चावलों को बार्नयार्ड बाजरा भी कहा जाता है। ये प्रोटीन से भरपूर होते हैं। ये शरीर से हानिकारक तत्व और गैरजरूरी पदार्थों को बाहर निकालने में मदद करते हैं। लेकिन हर दिन सीमित मात्रा में ही इनका सेवन करना चाहिए। अधिक खाने से ब्लड शुगर बहुत अधिक कम हो सकता है। वहीं डायबिटीज से पीड़ित मरीजों को ब्राउन राइस टोफू, चिकन, मछली और बींस के साथ ही करना चाहिए। इससे पाचन शक्ति स्लो हो जाएगी और ब्लड शुगर लेवल कंट्रोल रहेगा।

बासमती चावल से ब्लड शुगर कंट्रोल 

भारत में बासमती चावल को सबसे बेहतरीन माना जाता है। लेकिन इसे व्हाइट राइस नहीं माना जाता है। इसका ग्लाइसेमिक इंडेक्स 50 से 58 के बीच है। यानी इसका जीआई स्कोर भी बहुत कम है। जानकारों का मानना है कि डायबिटीज के मरीजों को अपने भोजन में बासमती राइस को जरूर शामिल करना चाहिए। यह पौष्टिक तत्वों से भरपूर आहार है लेकिन इसमें रत्ती भर भी शुगर, फैट, सोडियम, कोलेस्ट्रोल, पोटैशियम आदि नहीं है।

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