अक्सर ऐसा माना जाता है कि यूरीनरी ट्रैक्ट इंफेक्शन (यूटीआई) महिलाओं की समस्या है, लेकिन बदली हुई दिनचर्या और खानपान के कारण अब पुरुष भी इस परेशानी की जद में आ चुके हैं। कई बार व्यस्त शेड्यूल, पानी कम पीना, या ऑफिस के दौरान पेशाब रोकना संक्रमण का कारण बनता है। मरीजों को शुरुआत में हल्की जलन या बुखार जैसे मामूली लक्षण दिखते हैं, लेकिन लापरवाही करने पर यह इंफेक्शन गुर्दों या प्रोस्टेट तक पहुंच सकता है।
डॉक्टरों का कहना है कि गर्मी और बरसात के मौसम में साफ-सफाई का ध्यान रखना बहुत जरूरी है। गीले कपड़े देर तक पहनना या सार्वजनिक शौचालयों का इस्तेमाल भी संक्रमण के खतरे को बढ़ाता है। इसके लिए सबसे जरूरी है शरीर को हाइड्रेट रखिए, साफ-सफाई का ध्यान रखिए और थोड़े भी लक्षण महसूस हों तो मेडिकल सलाह जरूर लीजिए।
कारण क्या है?
यूटीआई की शुरुआत तब होती है जब बैक्टीरिया पेशाब की नलियों में प्रवेश करते हैं। आमतौर पर ई-कोलाई बैक्टीरिया इसका मुख्य कारण होता है, लेकिन अन्य बैक्टीरिया भी जिम्मेदार हो सकते हैं। शरीर में पानी की कमी (डिहाइड्रेशन), पेशाब रोकने की आदत, असुरक्षित यौन संबंध और प्रोस्टेट से जुड़ी मुश्किलें जैसे डायबिटीज या प्रोस्टेट ग्रंथि का बढ़ना, यूटीआई के खतरे को कई गुना बढ़ा देते हैं। उम्र बढ़ने पर प्रोस्टेट बढ़ना, या मूत्रमार्ग में रुकावट, पेशाब करते वक्त दर्द का कारण बनते हैं, जिससे संक्रमण की संभावना बढ़ जाती है।
कौन-कौन से लक्षण दिखते हैं?
- पेशाब करते समय जलन या तेज दर्द आना
- बार-बार पेशाब की चाह होना, लेकिन पेशाब कम आना
- पेशाब का रंग पीला या धुंधला होना, और उसमें बदबू या खून आना
- पेट के निचले हिस्से, पीठ या कमर में दर्द
- हल्का बुखार या ठंड लगना
- कमजोरी और थकान महसूस होना
इन लक्षणों को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए, क्योंकि इलाज में लापरवाही से संक्रमण गुर्दे, प्रोस्टेट या मूत्राशय तक फैल सकता है, जिससे जिंदगी को बड़ा खतरा हो सकता है।
कैसे बचें यूटीआई से?
- रोज अच्छी मात्रा में पानी पीना सबसे जरूरी है, जिससे शरीर के बैक्टीरिया फ्लश हो जाते हैं।
- पेशाब कभी न रोकें और समय पर सफाई का ध्यान रखें।
- सार्वजनिक शौचालय इस्तेमाल करने पर साफसफाई रखें, गीले या गंदे कपड़े बदलें।
- असुरक्षित यौन संबंध न बनाएं, और संबंध के बाद साफ-सफाई करें।
- डायबिटीज या प्रोस्टेट जैसी बीमारी हो तो नियमित जांच जरूरी है।
- किसी भी लक्षण पर सेल्फ मेडिकेशन न करें, डॉक्टर से सलाह लें और एंटीबायोटिक्स खुद से न लें।
- तनाव कम करें, पर्याप्त नींद लें और स्वस्थ दिनचर्या अपनाएं।
यूटीआई के चलते पुरुषों की रोजमर्रा की जिंदगी काफी प्रभावित हो सकती है। यह समस्या छोटे संकेत से शुरू होकर बड़ी परेशानी में बदल सकती है, इसलिए जागरूक रहें और अपने स्वास्थ्य को प्राथमिकता दें। सही आदतें, वक्त पर चिकित्सा और सतर्कता आपको यूटीआई जैसी तकलीफ से बचा सकते हैं।
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