डायबिटीज को सिर्फ एक आम बीमारी समझना गलत होगा, क्योंकि ये शरीर की कार्यप्रणाली और दिनचर्या को गहराई से प्रभावित करने वाली एक दीर्घकालिक स्थिति है। इसमें शरीर का ब्लड शुगर लेवल असंतुलित रहता है, जो समय-समय पर ऊपर-नीचे होता रहता है। खास बात ये है कि डायबिटीज की जड़ें हमारे खानपान, दिनचर्या और जीवनशैली में छिपी होती हैं। इसलिए इसका इलाज सिर्फ दवाइयों से नहीं, बल्कि एक संतुलित और अनुशासित जीवन जीने से संभव है। डायबिटीज के मरीजों को अपने खाने के समय, भोजन की गुणवत्ता और मात्रा, नींद, व्यायाम, तनाव प्रबंधन और नियमित जांच पर विशेष ध्यान देना होता है।
थोड़ी सी भी लापरवाही गंभीर परिणाम दे सकती है। आज के समय में जब देश में डायबिटीज के मरीजों की संख्या तेजी से बढ़ रही है, ऐसे में इसका सही प्रबंधन और जागरूकता बेहद जरूरी हो गया है। एक छोटी-सी समझदारी जीवन को बेहतर बना सकती है।
डायबिटीज में खानपान की भूमिका
डायबिटीज के मरीजों के लिए सबसे जरूरी है कि वे दिन भर में क्या खा रहे हैं, कितनी बार खा रहे हैं और दो मील के बीच कितना अंतराल रख रहे हैं। नाश्ते से लेकर डिनर तक हर मील की योजना सोच-समझकर बनानी चाहिए। क्योंकि ब्लड शुगर का स्तर सीधा खानपान से जुड़ा होता है और थोड़ी सी भी अनदेखी गंभीर समस्याएं पैदा कर सकती है।
विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि डायबिटीज के मरीज हर दो घंटे के अंतराल पर कुछ हल्का और पौष्टिक खाएं। यदि ये संभव न हो तो कम से कम दिन में चार बार—सुबह का नाश्ता, दोपहर का भोजन, शाम का हल्का स्नैक और रात का डिनर—जरूर लें।
ऐसे लोग जिनका ब्लड शुगर इंसुलिन या दवाइयों से नियंत्रित होता है, उन्हें अपने भोजन में बहुत सावधानी बरतनी चाहिए। डाइट में ताजे फल, हरी सब्जियां, लो-फैट डेयरी प्रोडक्ट और साबुत अनाज को प्राथमिकता दें। इससे शुगर स्पाइक की संभावना कम हो जाती है।
खाने की मात्रा और समय का रखें ध्यान
अगर आप दिन में कई बार खाते हैं, तो हर बार कम मात्रा में भोजन लें। बड़ी प्लेट की बजाय छोटी प्लेट का उपयोग करें ताकि आप ज्यादा खाने से बचें। साथ ही ये भी जरूरी है कि भोजन एक निश्चित समय पर करें। समय पर खाना ब्लड शुगर को स्थिर बनाए रखने में मदद करता है।
डायबिटीज मरीजों की बढ़ती संख्या
गौर करने वाली बात ये है कि भारत में डायबिटीज के मरीज तेजी से बढ़ रहे हैं। साल 2019 में जहां ये संख्या करीब 7 करोड़ थी, वहीं अब ये 10 करोड़ से ज्यादा हो चुकी है। ऐसे में जागरूकता और खानपान की सतर्कता बेहद जरूरी हो गई है।