Eli Lilly Weight-Loss Drug India: मोटापे और डायबिटीज की टेंशन से मिलेगा छुटकारा, मशहूर दवा मौनजारो भारत में लॉन्च

Eli Lilly Weight-Loss Drug: अमेरिका की जानी-मानी दवा कंपनी एली लिली ने भारत में मोटापे और टाइप 2 डायबिटीज से पीड़ितों के लिए मौनजारो लॉन्च कर दिया है। कंपनी को भारत में लॉन्च करने के लिए केंद्रीय औषधि मानक नियंत्रण संगठन (सीडीएससीओ) से मंजूरी मिल गई है। यह दवा ब्लड शुगर कंट्रोल और भूख कम करने में मदद करती है

अपडेटेड Mar 21, 2025 पर 12:06 PM
Eli Lilly Weight-Loss Drug: इस दवा का महीने का खर्च लगभग 14,000 रुपये से लेकर 17,000 रुपये तक हो सकता है।

अगर आप मोटापा और डायबिटीज से परेशान हैं, जल्द ही आपको इससे छुट्टी मिल जाएगी। अमेरिका की जानी-मानी दवा कंपनी एली लिली ने भारत में मोटापे और टाइप 2 डायबिटीज से पीड़ितों के लिए मौनजारो लॉन्च कर दिया है। यह दवा भारत के दवा नियामक से मंजूरी मिलने के बाद आई है। मौनजारो के 5 MG vial की कीमत 4,375 रुपये और 2.5 MG vial की कीमत 3,500 रुपये होगी। भारत में यह खास कीमत इसलिए रखी गई है ताकि ज्यादा से ज्यादा लोग इस आधुनिक इलाज तक पहुंच बना सकें। बता दें, भारत में करीब 10.1 करोड़ लोग डायबिटीज से पीड़ित हैं।

कंपनी की ओर से यह भी दावा किया गया है कि यह दवा मेटाबॉलिक हेल्थ सुधारने और वजन घटाने में काफी कारगार साबित होगी। भारत दुनिया का सबसे अधिक आबादी वाला देश है। यहां मोटापे और डायबिटीज के मामले बढ़ रहे हैं। है। यह दवा ब्लड शुगर कंट्रोल और भूख कम करने में मदद करती है।

कैसे काम करती है दवा?


कहा जाता है कि इस दवा को हफ्ते में एक बार सेवन किया जाता है। जिसका खर्च डॉक्टर की ओर से बताई गई डोज के मुताबिक, 14,000 रुपये से लेकर 17,500 रुपये प्रति महीना हो सकता है। यह मोटापा और टाइप-2 डायबिटीज के लिए पहली ऐसी दवा है जो GIP और GLP-1 हॉर्मोन रिसेप्टर्स को एक्टिवेट करती है। यह दवा एक नया और असरदार इलाज मुहैया करा सकती है। जिससे मरीजों का मेटाबॉलिक हेल्थ बेहतर हो सकता है। यह शरीर में इंसुलिन का उत्पादन बढ़ाने, ग्लूकागोन लेवल को घटाने, इंसुलिन सेंसिटिविटी सुधारने और भूख को कंट्रोल करने में मदद करती है। यह शरीर में फैट की मात्रा कम करती है और लिपिड यूटिलाइजेशन को रेगुलेट करता है।

10 करोड़ लोग मोटापे और डायबिटीज से पीड़ित

एली लिली ने एक बयान में कहा कि भारत में करीब 10 करोड़ लोग डायबिटीज और मोटापे से पीड़ित हैं। डायबिटीज के लिए एक प्रमुख रिस्क फैक्टर होने के अलावा मोटापा 200 से ज्यादा स्वास्थ्य जटिलाओं से भी जुड़ा हुआ है। जिसमें हाइपरटेंशन, कोरोनरी हृदय रोग और ऑब्सट्रक्टिव स्लीप एपनिया शामिल है।

किस उम्र में कितना होना चाहिए ब्लड शुगर लेवल?

फास्टिंग ब्लड शुगर का नॉर्मल रेंज 80-100 के बीच माना जाता है। अगर यह 100 से 125 है तो इसे प्रीडायबिटीज माना जाता है। अगर यह 126 mg/dL से ज्यादा होता है, तो इसे डायबिटिक माना जाता है। हालांकि इसके लिए HBA1C टेस्ट के जरिए कन्फर्म किया जाता है। बता दें कि HbA1c टेस्ट में 3 महीने की डायबिटीज की रिपोर्ट आ जाती है। जिसमें यह तय होता है कि मरीज डायबिटीज का शिकार है या नहीं। वहीं 40 से 60 साल के उम्र के लोगों को प्री डायबिटीज के लक्षणों से हमेशा सावधान रहना चाहिए। HbA1c टेस्ट में अगर 5.7 फीसदी 6.4 फीसदी है तो प्री डायबिटिक के शिकार हो सकते हैं। इससे ज्यादा होने पर डायबिटीज से पीड़ित माना जाता है।

डिस्क्लेमर: यह लेख सिर्फ सामान्य जानकारी के लिए है। किसी भी तरह से किसी दवा या इलाज का विकल्प नहीं हो सकता। ज्यादा जानकारी के लिए हमेशा अपने डॉक्टर से संपर्क करें।

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