Local 18
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गाजियाबाद में 15 साल बाद एक बार फिर पोलियो जैसे लक्षण मिलने के बाद हड़कंप मच गया है। यह मामला 18 महीने की एक बच्ची में देखा गया, जिसने स्वास्थ्य विभाग और विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) को अलर्ट कर दिया है। बच्ची के स्वास्थ्य की जांच के लिए एक विशेष टीम का गठन किया गया है।
स्वास्थ्य विभाग की सतर्कता
राजनगर एक्सटेंशन में रहने वाले एक दंपती ने अपनी 18 महीने की बेटी को गाजियाबाद के कंबाइंड अस्पताल की ओपीडी में दिखाया। बच्ची को कुछ दिनों से लड़खड़ाकर गिरने और पैरों में कंपन की शिकायत थी। चाइल्ड स्पेशलिस्ट डॉ. एमएल अग्रवाल ने बच्ची के लक्षणों को देखते हुए एक्विड फेलोरिसस पैरालाइज (एएफपी) की आशंका जताई और मामले की गंभीरता को देखते हुए काउंसलर को रेफर कर दिया।
WHO की जांच प्रक्रिया
WHO के अधिकारी डॉ. अभिषेक ने बताया कि इस संदिग्ध मामले की जानकारी मिलते ही एक जांच टीम बनाई गई है। टीम बच्ची की स्वास्थ्य स्थिति की विस्तृत जांच करेगी और पोलियो समेत अन्य संभावित बीमारियों के लिए सैंपल एकत्र करेगी। जांच रिपोर्ट आने तक इस मामले को पोलियो का संदिग्ध केस माना जा रहा है।
2009 के बाद का पहला मामला
डॉ. मुकेश यादव के अनुसार, गाजियाबाद में आखिरी बार पोलियो का मामला 2009 में सामने आया था, जब मसूरी नहर के पास झुग्गी-झोपड़ी में रहने वाले एक बच्चे में पोलियो की पुष्टि हुई थी। इसके बाद से जिले में कोई भी पोलियो का मामला नहीं देखा गया था।
क्या कहते हैं विशेषज्ञ?
चाइल्ड स्पेशलिस्ट डॉ. एमएल अग्रवाल का कहना है कि बच्ची को समय पर सभी टीके लगे हुए हैं, जिससे पोलियो की आशंका कम है। हालांकि, एएफपी के लक्षणों को देखते हुए यह मामला चिंता का विषय बना हुआ है, और रिपोर्ट का इंतजार किया जा रहा है।
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