आजकल की इस भागदौड़ भरी जिंदगी में कई बदलाव आए हैं। लोगों के रहन-सहन और खानपान में बहुत बदलाव आया है। बहुत से लोग अपनी नींद पर भी ध्यान नहीं देते हैं। नींद पूरी नहीं होने से कई तरह की समस्याओं के शिकार हो सकते हैं। आमतौर पर लोगों को कम से कम रोजाना 7 घंटे की नींद बेहद जरूरी है। अगर नींद पूरी नहीं होती है तो इसका असर शारीरिक और मानसिक स्तर पर पड़ता है। लिहाजा हमारे शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य के लिए बेहद जरूरी है। कम सोने से कैंसर, डायबिटीज और हार्ट अटैक जैसी कई बीमारियों का सामना करना पड़ सकता है।
एक्सपर्ट्स का कहना है कि अगर आप 6 घंटे से कम सोते हैं तो कैंसर का खतरा 300 गुना बढ़ जाता है। साथ ही हार्ट अटैक का खतरा भी 200 गुना हो जाता है। अगर इन जानलेवा बीमारियों से आप दूर रहना चाहते हैं तो हर दिन पर्याप्त नींद जरूर लेना चाहिए। आजकल बहुत से लोगों के सोने का नियम ही बदल गया है। लोग लेट नाइट सोते हैं और फिर सुबह देर तक सोते हैं। बहुत से लोगों का सवेरा तो सुबह 11 बजे तक होता है। सोने का यह नियम सेहत के लिए हानिकारक साबित हो सकता है।
दरअसल, सूरज डूबने के बाद अंधेरे के साथ मेलाटोनिन का प्रोडक्शन होता है। ये सोने का सामान्य समय होता है, लेकिन इस दौरान पर्याप्त मात्रा में नींद न लेने के कारण शरीर मेलाटोनिन नहीं बना पाता है। जिससे कैंसर को बढ़ावा मिल सकता है। इसलिए नाइट शिफ्ट की जॉब करने वालों में भी कैंसर का खतरा बना रहता है। मेलाटोनिन ब्रेन में बनने वाला एक हार्मोन है। इसका प्रोडक्शन दिन के समय पर निर्भर करता है। अंधेरे में ये बढ़ जाता है। दिन की रोशनी में इसका प्रोडक्शन घट जाता है। इस मेलाटोनिन हार्मोन के कई एंटी-कैंसर प्रभाव होते हैं। ये कैंसर की सेल्स को नष्ट करते हैं। इम्यून रिस्पॉन्स को एक्टिव करते हैं, जिससे कैंसर के बढ़ने की और साथ ही इसके मेटास्टेसिस यानी शरीर में फैलने की क्षमता कम होती है।
कम सोने से हार्ट अटैक का खतरा
अगर कोई लगातार कम सोता है, तो उसके हार्ट पर दबाव बढ़ता है। जिससे हार्ट अटैक और स्ट्रोक आने का खतरा बढ़ जाता है। नींद की कमी से ब्लड प्रेशर बढ़ सकता है। इसके साथ ही ब्लड वेसल्स में सूजन आ सकती है। इससे दिल की बीमारियों का खतरा बढ़ सकता है।
नींद नहीं पूरी होन से डायबिटीज का खतरा भी बना रहता है। इससे शरीर में इंसुलिन बैलेंस पर असर पड़ता है। टाइप-2 डायबिटीज का जोखिम बढ़ता है। जब शरीर पर्याप्त नींद नहीं लेता, तो यह शरीर के ग्लूकोज मेटाबोलिज्म को प्रभावित करता है। इससे ब्लड शुगर लेवल बढ़ सकता है।