संदीप घोष पर CBI के बाद ED ने कसा शिकंजा, आरजी कर अस्पताल में वित्तीय गड़बड़ी के खिलाफ दर्ज किया मनी लॉन्ड्रिंग केस

Kolkata Rape Murder Case: केंद्रीय एजेंसी ने केंद्रीय जांच ब्यूरो की शुरुआति जांच और FIR के आधार पर मामला दर्ज किया, जिसमें भ्रष्टाचार के लिए पूर्व प्रिंसिपल डॉ. संदीप घोष का नाम शामिल था। CBI ने संदीप घोष का नाम उनके कार्यकाल के दौरान संस्थान में कथित वित्तीय अनियमितताओं की जांच के संबंध में दर्ज किया है

अपडेटेड Aug 27, 2024 पर 12:46 PM
संदीप घोष पर ED ने दर्ज किया मनी लॉन्ड्रिंग का केस

प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने कोलकाता के सरकारी आरजी कर मेडिकल कॉलेज एंड अस्पताल में कथित वित्तीय अनियमितताओं के खिलाफ मनी लॉन्ड्रिंग का मामला दर्ज किया है। इस महीने की शुरुआत में 31 साल प्रशिक्षु डॉक्टर के साथ बलात्कार किया गया था और उसकी हत्या कर दी गई थी। केंद्रीय एजेंसी ने केंद्रीय जांच ब्यूरो की शुरुआति जांच और FIR के आधार पर मामला दर्ज किया, जिसमें भ्रष्टाचार के लिए पूर्व प्रिंसिपल डॉ. संदीप घोष का नाम शामिल था।

CBI ने संदीप घोष का नाम उनके कार्यकाल के दौरान संस्थान में कथित वित्तीय अनियमितताओं की जांच के संबंध में दर्ज किया है।

एजेंसी ने भारतीय दंड संहिता (IPS) की धारा 120B (आपराधिक साजिश) धारा 420 (धोखाधड़ी) के साथ पठित और भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, 1988 (2018 में संशोधित) की धारा सात लगाई है, जो एक लोक सेवक की ओर से अवैध रूप से रिश्वत स्वीकार करने से जुड़ा है।


घोष के अलावा इनके खिलाफ दर्ज हुआ केस

कलकत्ता हाई कोर्ट के एक वरिष्ठ वकील ने कहा कि इन सभी मामलों को एक साथ पढ़ने पर ये संज्ञेय अपराध लगते हैं और गैर-जमानती प्रकृति के हैं।

घोष के अलावा, सीबीआई ने मध्य जोरहाट, बानीपुर, हावड़ा के मेसर्स मा तारा ट्रेडर्स, जेके घोष रोड, बेलगछिया, कोलकाता के मेसर्स ईशान कैफे और मेसर्स खामा लौहा के खिलाफ भी मामला दर्ज किया है।

राज्य स्वास्थ्य विभाग के विशेष सचिव देबल कुमार घोष की ओर से दर्ज कराई गई लिखित शिकायत के आधार पर FIR दर्ज की गई।

SIT से CBI ने लिया केस

CBI की ओर से कलकत्ता हाई कोर्ट के निर्देश पर राज्य सरकार की SIT से जांच अपने हाथ में लेने के बाद शनिवार को प्राथमिकी दर्ज की गई थी। नौ अगस्त को एक महिला चिकित्सक से कथित बलात्कार और हत्या के मामले में पश्चिम बंगाल सरकार ने SIT बनाई थी।

यह आदेश आरजी कर अस्पताल के पूर्व सुपरिटेंडेंट अख्तर अली की याचिका पर जारी किया गया, जिन्होंने संस्थान में कथित वित्तीय कदाचार की प्रवर्तन निदेशालय (ED) से जांच कराने का अनुरोध किया था।

अली ने हाई कोर्ट का रुख किया था, क्योंकि इस बात को लेकर अटकलें लगाई जा रही थीं कि क्या संस्थान में कथित भ्रष्टाचार का संबंध महिला डॉक्टर की मौत से जुड़ा है, और क्या पीड़िता को इसकी जानकारी थी एवं इससे मामले के उजागर होने का खतरा था।

लावारिस लाशों की अवैध बिक्री का आरोप

अली ने यह भी आरोप लगाया था कि एक साल पहले राज्य सतर्कता आयोग और भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो के समक्ष घोष के खिलाफ दर्ज कराई गई उनकी शिकायतों का कोई खास नतीजा नहीं निकला और इसके बजाय उन्हें संस्थान से स्थानांतरित कर दिया गया।

हाई कोर्ट के समक्ष अपनी याचिका में अली ने घोष पर लावारिस शवों की अवैध बिक्री, जैव-चिकित्सा अपशिष्ट की तस्करी तथा दवा और चिकित्सा उपकरण आपूर्तिकर्ताओं द्वारा दिए गए कमीशन पर निविदाएं जारी करने का आरोप लगाया।

अली ने यह भी आरोप लगाया कि छात्रों पर परीक्षा पास करने के लिए पांच से आठ लाख रुपये तक की रकम देने का दबाव बनाया गया था। घोष ने फरवरी 2021 से सितंबर 2023 तक आरजी कर अस्पताल के प्राचार्य के रूप में काम किया। उन्हें उस वर्ष अक्टूबर में चिकित्सा प्रतिष्ठान से स्थानांतरित कर दिया गया था, लेकिन एक महीने के भीतर ही वह उस पद पर वापस आ गए। महिला डॉक्टर की हत्या वाले दिन तक वह अस्पताल में कार्यरत थे।

सीबीआई ने रविवार को भ्रष्टाचार के मामलों के सिलसिले में घोष के कोलकाता स्थित बेलियाघाटा आवास पर एक दिन की तलाशी ली। एजेंसी ने घोष से लगातार 10 दिन तक पूछताछ की है और बलात्कार तथा हत्या की जांच के सिलसिले में सोमवार को उनका ‘पॉलीग्राफ टेस्ट’ भी कराया।

सीबीआई ने अस्पताल के पूर्व अधीक्षक संजय वशिष्ठ और ‘फॉरेंसिक डेमोस्ट्रेटर’ देबाशीष सोम को भी भ्रष्टाचार के आरोपों के संबंध में पूछताछ के लिए एजेंसी के निजाम पैलेस कार्यालय में बुलाया है।

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