प्रोफेसर प्रताप भानु मेहता (Pratap Bhanu Mehta) के ठीक दो दिन बाद अब प्रसिद्ध अर्थशास्त्री अरविंद सुब्रमण्यम (Arvind Subramanian) ने भी अपने पद से इस्तीफा दे दिया है। अरविंद सुब्रमण्यम ने निजी कारणों का हवाला देते हुए प्रोफेसर पद से इस्तीफा दे दिया है। अरविंद सुब्रमण्यम का अशोका यूनिवर्सिटी (Ashoka University) से जाना संस्थान की प्रतिष्ठा के लिए बड़ा झटका है। निजी, उदारवादी परोपकारी द्वारा उच्च शिक्षा के लिए बनाए गए इस संस्थान के लिए ये निराशाजनक है।
इससे पहले जाने-माने स्कॉलर और राजनीतिक विश्लेषक प्रताप भानु मेहता ने मंगलवार को अशोका यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर पद से इस्तीफा दे दिया था। दो साल पहले वह यूनिवर्सिटी के वाइस चांसलर पद से भी इस्तीफा दे चुके थे। मेहता ने लगातार अपने लेखन से और सार्वजनिक तौर पर सत्ता पर सवाल उठाए हैं। उन्हें राजनीति और राजनीतिक सिद्धांत, संवैधानिक कानून, शासन और राजनीतिक अर्थव्यवस्था पर देश के अग्रणी स्कॉलर्स में से एक माना जाता है।
इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के अनुसार, यूनिवर्सिटी से यह पूछा गया कि प्रताप भानु मेहता की ओर से सरकार की आलोचना करने और उनके इस्तीफा देने के बीच कुछ संबंध तो नहीं है, लेकिन यूनिवर्सिटी ने इस सवाल से खुद को अलग कर लिया। हालांकि, एक प्रवक्ता ने उनके इस्तीफे की पुष्टि करते हुए कहा कि कुलपति और फैकल्टी मेंबर के रूप में अपने कार्यकाल के दौरान उन्होंने यूनिवर्सिटी में बहुत योगदान दिया है। अशोका विश्वविद्यालय उन्हें उनके भविष्य के लिए शुभकामनाएं देता है।
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