Agnipath Scheme Protest: 'सेना को गुंडों की जरूरत नहीं है' देशभर में अग्निपथ के विरोध में आगजनी पर बोले पूर्व सेनाध्यक्ष
देशभर में आगजनी के बीच जनरल मलिक ने कहा कि गुंडागर्दी, ट्रेन और बसों को जलाने वाले आंदोलनकारी, वे लोग नहीं हैं, जिन्हें हम सशस्त्र बलों में रखना चाहेंगे। क्योंकि हम हिंसा करने वाले गुंडों को सेना में भर्ती नहीं करते हैं
MoneyControl News
अपडेटेड Jun 17, 2022 पर 5:04 PM
1999 कारगिल युद्ध के दौरान सेना प्रमुख रहे रिटायर्ड जनरल वीपी मलिक
Agnipath Scheme Protest: देशभर में केंद्र सरकार की सेना में भर्ती की शॉर्ट टर्म सर्विस स्कीम 'अग्निपथ' (Agnipath Scheme) के विरोध में युवाओं ने बवाल काटा हुआ है। कहीं सड़क जाम कर दी गईं, तो कहीं ट्रेनों में आग लगा दी गई। इस बीच 1999 कारगिल युद्ध के दौरान सेना प्रमुख रहे रिटायर्ड जनरल वीपी मलिक (General VP Malik) ने कहा कि हम सेना में गुंडों की भर्ती नहीं करते हैं।
देशभर में आगजनी के बीच जनरल मलिक ने कहा, "गुंडागर्दी, ट्रेन और बसों को जलाने वाले आंदोलनकारी, वे लोग नहीं हैं, जिन्हें हम सशस्त्र बलों में रखना चाहेंगे। क्योंकि हम हिंसा करने वाले गुंडों को सेना में भर्ती नहीं करते हैं।"
मलिक ने इस तथ्य पर जोर दिया कि भारतीय सेना एक स्वयंसेवी बल है। वो कोई कल्याणकारी संगठन नहीं है। उन्होंने कहा कि इसमें देश के लिए लड़ने और रक्षा करने वाले सर्वश्रेष्ठ लोगों को ही भर्ती किया जाता है।
पूर्व सेना प्रमुख ने शुक्रवार को एक इंटरव्यू में NDTV को बताया, "हमें यह समझना होगा कि सशस्त्र बल एक स्वयंसेवी बल हैं। यह एक कल्याणकारी संगठन नहीं है और इसमें देश के लिए लड़ने वाले सबसे अच्छे लोग होने चाहिए, जो देश की रक्षा कर सकें। वे लोग जो गुंडागर्दी करते हैं। ट्रेन और बसें जलाते हैं। वे वे लोग नहीं हैं, जिन्हें हम सशस्त्र बलों में रखना चाहेंगे।"
सशस्त्र बलों में भारतीय युवाओं के लिए केंद्र की अग्निपथ भर्ती योजना ने पूरे भारत के कई राज्यों में भीषण आंदोलन और विरोध का सामना किया है। इसे एक ऐतिहासिक और परिवर्तनकारी कदम बताया जा रहा है।
नौकरी की गारंटी और दूसरे मुद्दों पर भर्ती योजना के खिलाफ बिहार, राजस्थान, उत्तर प्रदेश, तेलंगाना और कुछ और राज्यों में बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन हुए। हालांकि, कई राज्यों ने ऐसी योजनाओं की भी घोषणा की है।
इन उम्मीदवारों के साथ है सहानुभूति
मलिक, हालांकि, उन उम्मीदवारों के साथ सहानुभूति रखते हैं, जो भर्ती रद्द होने के दौरान परीक्षा को पूरा नहीं कर सके। साथ ही भर्ती फिर से शुरू होने तक उनकी उम्र निकल जाएगी।
उन्होंने कहा, "इनमें से कुछ लोग अब ज्यादा उम्र के होंगे। वे अग्निपथ योजना के तहत भर्ती नहीं हो पाएंगे। इसलिए मैं उनकी चिंता और हताशा को समझ सकता हूं।"
इसके अलावा, जनरल मलिक ने केंद्र के स्पष्टीकरण को दोहराया कि चार साल बाद बेरोजगारी का डर गैर-जरूरी है, क्योंकि सरकार ने पुलिस और अर्धसैनिक बलों में लेटरल एंट्री का आश्वासन दिया है।
उन्होंने कहा, " इन लोगों को बड़ी संख्या में पुलिस बल और निजी क्षेत्र में शामिल किया जाएगा। भले ही इसकी गारंटी अभी नहीं दी जा सकती है।"
जब उनसे पूछा गया कि चार साल में हाई-टेक सिस्टम को संभालने के लिए प्रशिक्षित युवाओं की एक बड़ी संख्या खत्म हो जाएगी, तो जनरल मलिक ने कहा, "अब जोर उन लोगों की भर्ती पर है जो बेहतर शिक्षित हैं और तकनीक की समझ रखते हैं। इसलिए आईटी संस्थानों के लोगों को रोजगार देने का भी कोशिश की जा रही है।"
जनरल मलिक ने कहा, "उन्हें बोनस अंक दिए जाते हैं। हम सशस्त्र बलों में ऐसे ही लोग चाहते हैं। कारगिल युद्ध के दौरान, कई ऐसे थे जो विभिन्न रेजिमेंट बलों से आए थे और पैदल सेना बटालियन में शामिल हो गए और उन्होंने युद्ध लड़ा।"
भारत के कारगिल शहीदों कैप्टन हनीफ उद्दीन और विजयंत थापर का नाम लेते हुए जनरल मलिक ने कहा कि उन्होंने अपनी रेजिमेंटों को छोड़ दिया और अपनी जान गंवाकर लड़ाई लड़ी।
उन्होंने कहा, "तो, मैं इस बात से सहमत नहीं हूं कि चार साल काफी नहीं हैं। हां, तकनीकी समझ रखने वाले लोगों को विस्तार दिया जा सकता है। लेकिन फिर से, मैं इस बात पर जोर देना चाहता हूं कि योजना को गति में आने दें। एक बार जब हमें पता चल जाए कि कमियां कहां हैं, तो सुधार किया जा सकता है।"