चीन में पढ़ने वाले इंडिया के 23000 मेडिकल स्टूडेंट्स का करियर खतरे में, सरकार से मांगी मदद

स्टूडेंट्स और उनके माता-पिता इस मामले में सरकार की मदद चाहते हैं। उनका कहना है कि सरकार को इस मामले में हस्तक्षेप करना चाहिए। अपनी मांग को लेकर स्टूडेंट्स दिल्ली में जंतर मंतर, एनएमसी ऑफिस पर प्रदर्शन कर रहे हैं

अपडेटेड Jun 01, 2022 पर 5:00 PM
इन स्टूडेंट्स का कहना है कि जब तक वे चीन नहीं लौट जाते, उन्हें इंडिया में क्लिनिकल और प्रैक्टिकल ट्रेनिंग की इजाजत दी जाए।

चीन में मेडिकल की पढ़ाई कर रहे 23,000 इंडियन स्टूडेंट्स का करियर खतरे में है। ये स्टूडेंट्स ऑफलाइन प्रैक्टिकल क्लासेज नहीं कर पा रहे हैं। इसके बगैर इंडिया में मेडिकल की उनकी डिग्री इंडिया में वैलिड नहीं मानी जाएगी। दरअसल, चीन के मेडिकल कॉलेज में प्रैक्टिकल क्लासेज ऑनलाइन चल रही हैं। लेकिन, इंडिया में नेशनल मेडिकल कमीशन (NMC) ऑनलाइन प्रैक्टिकल क्लासेज को मान्यता नहीं देता है।

इनमें से कई स्टूडेंट्स और उनके माता-पिता इस मामले में सरकार की मदद चाहते हैं। उनका कहना है कि सरकार को इस मामले में हस्तक्षेप करना चाहिए। अपनी मांग को लेकर स्टूडेंट्स दिल्ली में जंतर मंतर, एनएमसी ऑफिस पर प्रदर्शन कर रहे हैं। उन्होंने स्वास्थ्य मंत्रालय को भी पत्र लिखकर मदद की मांग की है।

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इन स्टूडेंट्स का कहना है कि जब तक वे चीन नहीं लौट जाते, उन्हें इंडिया में क्लिनिकल और प्रैक्टिकल ट्रेनिंग की इजाजत दी जाए। कोरोना वायरस की महामारी की वजह से चीन में पढ़ रहे मेडिकल स्टूडेंट्स दो साल से ज्यादा समय से कॉलेज से दूर हैं।

चीन के नानटोंग मेडिकल यूनिवर्सिटी में फाइनल ईयर के स्टूडेंट शहरोज खान शेरी ने कहा कि चीन में मेडिकल कॉलेज ऑनलाइन प्रैक्टिकल्स करा रहे हैं। लेकिन, हमारे लिए ये बेकार है, क्योंकि NMC इसे मान्यता नहीं देता है। उन्होंने कहा, "हम करीब 850 दिनों से कैंपस से दूर हैं। क्लासेज और प्रैक्टिकल्स ऑनलाइन हो रहे हैं। लेकिन एनएमसी की शर्त है कि ऑफलाइन प्रैक्टिकल्स और क्लिनिकल ट्रेनिंग मेडिकल यूनिवर्सिटीज में होनी चाहिए। इसलिए हम सरकार का इस मामले में हस्तक्षेप चाहते हैं।"

मेडिकल स्टूडेंट्स का एक प्रतिनिधिमंडल हाल में एनएमसी के अधिकारियों से मुलाकात की थी। कमीशन ने कहा कि वह उनकी प्रॉब्लम से अवगत है। वह मामले का समाधान निकालने की कोशिश कर रहा है। एनएमसी के अधिकारियों का कहना है कि एक ऑप्शन यह है कि इन स्टूडेंट्स को किसी तीसरे देश में ट्रांसफर कर दिया जाए। विदेश में कई यूनिवर्सिटीज और कॉलेज इस तरह की सुविधा देते हैं लेकिन इनसे कुछ शर्तें जुड़ी होती हैं।

एक स्टूडेंट ने कहा कि इंटरनेशनल एमबीबीएस प्रोग्राम के बीच में किसी तीसरे देश में ट्रांसफर करना एक ऑप्शन है, लेकिन इसकी अपनी समस्याएं हैं। चीन की शैनडोंग यूनिवर्सिटी में थर्ड ईयर की स्टूडेंट रचिता कुर्मी ने रूस में मास्को की शेचेनेव यूनिवर्सिटी में अपना ट्रांसफर कराया है। उन्होंने कहा कि इसका प्रोसेस बहुत जटिल है। इससे हमारी पढ़ाई में और एक साल की देर हो सकती है।

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