कोरोना महामारी की दूसरी लहर के बीच देश में अचानक पल्स ऑक्सीमीटर (Pulse Oximeter) को लेकर चर्चा काफी तेज हो गई है। दरअसल, यह एक ऐसा छोटा डिवाइस है, जो शरीर में ऑक्सीजन का सैचुरेशन लेवल (oxygen saturation level) को मापने में हमारी मदद करता है। स्वास्थ्य विभाग होम आइसोलेशन में भर्ती मरीजों का समय-समय पर ऑक्सीजन लेवल पूछता है, जिससे ऑक्सीजन कम होने पर समय से अस्पताल पहुंचाया जा सके। यही वजह है कि पल्स ऑक्सीमीटर की मांग बढ़ गई है।
ताजा स्थिति यह है कि बाजार में ऑक्सीमीटर की कमी पड़ने लगी है। आज के समय में ऑक्सीमीटर हर घर में स्मार्टफोन से ज्यादा जरूरी हो गया है। ऐसे में मांग बढ़ने के कारण निर्माताओं ने ऑक्सीमीटर की कीमतों में इजाफा कर दिया है। जो आर्थिक रूप से कमजोर हैं उनके लिए हाल ही में कोलकाता स्थित हेल्थ स्टार्टअप ने एक मोबाइल ऐप डेवलप की है जो कि ऑक्सीमीटर की जगह पर इस्तेमाल की जा सकती है।
इस मोबाइल ऐप को CarePlix Vital कहा जाता है जो कि जो कि यूजर के ब्लड ऑक्सीजन लेवल, पल्स और रेसप्रेशन रेट्स को मॉनिटर करने का काम करती है। इस मोबाइल ऐप को इस्तेमाल करने के लिए आपको अपने स्मार्टफोन के रियर कैमरे और फ्लैशलाइट पर उंगली रखनी है। कुछ सेकंड के अंदर ही ऑक्सीजन सेटुरेशन (SpO2), पल्स और रेसिपिरेशन लेवल डिस्प्ले पर नजर आता है। उन्होंने आगे कहा कि अब हम इस टेक्नोलॉजी को स्मार्टफोन के रियर कैमरे और टॉर्च के जरिए ला रहे हैं।
CareNow Healthcare के को-फाउंडर सुभब्रत पॉल ने इंडियन एक्सप्रेस को बताया कि लोगों को ऑक्सीजन सेटूरेशन और पल्स रेट जैसी जानकारी हासिल करने के लिए पल्स ऑक्सीमीटर या स्मार्टवॉच आदि डिवाइस की जरूरत पड़ती है। इस डिवाइस में इंटरनल टेक्नोलॉजी की बात जाए तो फोटोप्लेथिस्मोग्राफी या पीपीजी इस्तेमाल की जाती है।
बता दें कि पल्स ऑक्सीमीटर से ये पता चलता है कि लाल रक्त कणिकाएं (RBCs) कितना ऑक्सीजन यहां से वहां ले जा रही हैं। इसे पीपीओ यानी पोर्टेबल पल्स ऑक्सीमीटर भी कहा जाता है। इस डिवाइस के जरिए डॉक्टर, नर्स या किसी भी स्वास्थ्य पेशेवर को यह पता करने में मदद करती है कि किसी व्यक्ति को अतिरिक्त ऑक्सीजन की आवश्यकता है या नहीं।
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