Chandrayaan-3 Mission: 13 जुलाई को लॉन्च होगा ISRO का चंद्रयान-3 मिशन

Chandrayaan-3 Mission: चंद्रयान-3 को आंध्र प्रदेश के श्रीहरिकोटा स्थित सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र से प्रक्षेपण यान मार्क-3 के जरिये लॉन्च किया जाएगा। उन्होंने बताया कि इसके लिए 13 जुलाई को दोपहर ढाई बजे का समय तय किया गया है। हालांकि, मीडिया से बात करते हुए ISRO चीफ ने कहा, "वर्तमान में चंद्रयान 3 अंतरिक्ष यान पूरी तरह से एकीकृत है। हमने परीक्षण पूरा कर लिया है...12-19 जुलाई के बीच लॉन्च होने की उम्मीद है

अपडेटेड Jun 28, 2023 पर 7:56 PM
Chandrayaan-3 Mission: 13 जुलाई को लॉन्च होगा ISRO का चंद्रयान-3 मिशन (FILE PHOTO)

चंद्रयान-3 ( Chandrayaan-3) के प्रक्षेपण के लिए 13 जुलाई को दोपहर ढाई बजे का समय तय किया गया है। अधिकारियों ने बुधवार को यह जानकारी दी। चंद्रमा की सतह पर सुरक्षित रूप से उतरने और वहां गतिविधियां करने की क्षमता दिखाने के लिए चंद्रयान-2 के बाद का यह एक अभियान है। इंडियन स्पेस रिसर्च ऑर्गेनाइजेशन (ISRO) प्रमुख एस. सोमनाथ (S Somanath) ने बताया कि चंद्रयान-3 12-19 जुलाई के बीच लॉन्च होने की उम्मीद है।

न्यूज एजेंसी PTI ने अधिकारियों के हवाले से कहा, चंद्रयान-3 को आंध्र प्रदेश के श्रीहरिकोटा स्थित सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र से प्रक्षेपण यान मार्क-3 के जरिये लॉन्च किया जाएगा। उन्होंने बताया कि इसके लिए 13 जुलाई को दोपहर ढाई बजे का समय तय किया गया है।

हालांकि मीडिया से बात करते हुए ISRO चीफ ने कहा, "वर्तमान में चंद्रयान 3 अंतरिक्ष यान पूरी तरह से एकीकृत है। हमने परीक्षण पूरा कर लिया है...12-19 जुलाई के बीच लॉन्च होने की उम्मीद है...हम सभी परीक्षण पूरे होने के बाद बिल्कुल सही तारीख की घोषणा करेंगे।"


ISRO प्रमुख एस सोमनाथ कहते हैं, "हम आर्टेमिस समझौते को अमेरिका के साथ एक राजनीतिक जुड़ाव के रूप में देख रहे हैं। यह आशय का एक बयान है कि जब अमेरिका अंतरिक्ष क्षेत्र में सहयोग के साथ काम का प्रस्ताव दे रहा है, खासतौर से सौहार्दपूर्ण माहौल में बाहरी ग्रहों की खोज अलग-अलग राष्ट्र, हम इससे सहमत हैं। हम अमेरिका के साथ काम करना चाहेंगे, खासकर उन तकनीक पर जो हाई लेवल की हैं। इससे अंतरिक्ष क्षेत्र में काम कर रहे भारतीय इंडस्ट्री के लिए अमेरिकी कंपनियों के साथ काम करने के अवसर खुलेंगे. जो समान रूप से काम कर रहे हैं।"

इसके अलावा ISRO प्रमुख एस सोमनाथ सूरज का अध्ययन करने के लिए भारत के पहले मिशन, आदित्य-एल1 मिशन (Aditya L1 Mission) पर भी अपडेट दिया। उन्होंने कहा, "...हमारा लक्ष्य है कि 10 अगस्त तक आदित्य लॉन्च किया जा सके।"

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प्रोपेलेंट मॉड्यूल ‘लैंडर’ और ‘रोवर’ को 100 किलोमीटर तक चंद्रमा की कक्षा में ले जाएगा। इसमें, चंद्रमा की कक्षा से पृथ्वी के ध्रुवीय मापन का अध्ययन करने के लिए एक ‘स्पेक्ट्रो-पोलरमेट्री’ पेलोड भी जोड़ा गया है।

पिछला मिशन चंद्रमा की परिक्रमा करने में कामयाब रहा था, लेकिन विक्रम लैंडर को एक कठिन लैंडिंग का सामना करना पड़ा, जिससे रोवर को योजना के अनुसार तैनात नहीं किया जा सका।

ISRO अधिकारी आगामी मिशन की सफलता की संभावना को लेकर आशावादी हैं। चंद्रयान-3 मिशन से चंद्रमा के बारे में हमारी समझ और गहरी होने की उम्मीद है, जिसका मुख्य मकसद चंद्रमा की सतह पर सॉफ्ट-लैंडिंग और रोबोटिक रोवर ऑपरेट करने की क्षमता देखना है।

लॉन्चिंग GSLV Mark 3 हेवी-लिफ्ट लॉन्च वाहन का इस्तेमाल करके भारत के श्रीहरिकोटा में सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र में होने वाला है। मिशन का बजट ₹615 करोड़ रखा गया है।

जोखिमों को कम करने और एक सफल मिशन सुनिश्चित करने के लिए चंद्रयान-3 को कठोर टेस्टिंग और वैरिफिकेशन प्रोसेस से गुजरना पड़ा है। चंद्र पेलोड कॉन्फ़िगरेशन समेत मिशन डिजाइन को पिछले मिशन से सीखे गए सबक के आधार पर तैयार किया गया है।

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