Chandrayaan-3 Updates: चांद की मिट्टी में गहराई तक जाकर खोज कर रहा चंद्रयान-3, साउथ पोल से सामने आए पहले नतीजे

Chandrayaan-3 Updates: चंद्रमा की सतह काफी ऊबड़ खाबड़ है और अलग-अलग मोटाई के 'रेजोलिथ' नाम के मलबे की परत से ढकी हुई है। वर्तमान समझ यह है कि सतह कुछ हद तक "कोमल" है और गुड कंडक्टर ऑफ हीट नहीं हो सकती है। अंतरिक्ष वैज्ञानिकों का कहना है कि निकट भविष्य में चंद्रमा पर इंसानों को बसाने की योजना के लिए चंद्रमा की मिट्टी की बदलती प्रकृति को समझना बहुत जरूरी है

अपडेटेड Aug 29, 2023 पर 3:25 PM
Chandrayaan-3 Updates: चांद की मिट्टी में गहराई तक जाकर खोज कर रहा चंद्रयान-3

चांद की धरती (Lunar Soil) के भीतर छिपे कई रहस्यों को जानने के लिए, भारत के ऐतिहासिक मून मिशन (Moon Mission) चंद्रयान-3 (Chandrayaan-3) ने कई जरूरी और महत्वपूर्ण डेटा जुटाना शुरू कर दिया है। ये चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव (South Pole) पर अपनी तरह की पहली खोज है। चंद्रमा पर रोवर प्रज्ञान के साथ लैंडर विक्रम को उतरे हुए पांच दिन हो चुके हैं और इसके सभी आठ साइंटिफिक पेलोड एकदम एक्टिव हैं। इस तरह के पहले निष्कर्ष चंद्र सरफेस थर्मो फिजिकल एक्सपेरिमेंट (ChaSTE) के जरिए सामने आए हैं। ChaSTE लैंडर विक्रम के पेलोड में से एक है।

ये एक्सपेरिमेंट खासतौर से स्पेस फिजिक्स लैबोरेट्री (SPL), विक्रम साराभाई अंतरिक्ष केंद्र (VSSC) की तरफ से स्पेस फिजिक्स लैबोरेट्री (PRL), अहमदाबाद के सहयोग से पोलर रीजन के पास चांद के ऊपरी मिट्टी के थर्मल गुणों को मापने के लिए विकसित किया गया था।

चांद के साउथ पोल पर पहली बार ऐसी खोज


चंद्रमा की सतह काफी ऊबड़ खाबड़ है और अलग-अलग मोटाई के 'रेजोलिथ' नाम के मलबे की परत से ढकी हुई है। वर्तमान समझ यह है कि सतह कुछ हद तक "कोमल" है और गुड कंडक्टर ऑफ हीट नहीं हो सकती है। अंतरिक्ष वैज्ञानिकों का कहना है कि निकट भविष्य में चंद्रमा पर इंसानों को बसाने की योजना के लिए चंद्रमा की मिट्टी की बदलती प्रकृति को समझना बहुत जरूरी है।

इंडियन स्पेस रिसर्च ऑर्गनाइजेशन (ISRO) की तरफ से शेयर किए गए ग्राफ में चांद की सतह पर 0 से 50 डिग्री सेल्सियस तक इस बदलते तापमान दिखाया गया है। लैंडर की तरफ से अलग-अलग गहराई पर ये तापमान दर्ज किया गया है। वैज्ञानिकों का कहना है कि हालांकि, डेटा काफी शुरुआती है, और ये चंद्रमा पर दिन के समय के आधार पर बदलता रहेगा।

ISRO की तरफ से शेयर किए गए एक ग्राफ में लैंडर से अलग-अलग गहराई पर दर्ज किया गया चांद की सतह पर बदलता तापमान ISRO की तरफ से शेयर किए गए एक ग्राफ में लैंडर से अलग-अलग गहराई पर दर्ज किया गया चांद की सतह पर बदलता तापमान

News18 के मुताबिक, फिजिकल रिसर्च लेबोरेटरी, अहमदाबाद के डायरेक्टर डॉ. अनिल भारद्वाज ने बताया, “गहराई से खोज चल रही हैं। लेकिन ये डेटा पुष्टि करता है कि हमारे वैज्ञानिक उपकरण चंद्रमा पर अच्छा काम कर रहे हैं और जरूरत के मुताबिक, डेटा इकट्ठा कर रहे हैं।"

चंद्रयान-3 का लैंडर हर एक गहराई पर तापमान में बदलाव को मापने के लिए चंद्रमा की मिट्टी में 10 cm तक गहराई में जाकर, ये डेटा इकट्ठा कर रहा है। इसमें 10 तापमान सेंसर लगे हैं।

ग्रह और अंतरिक्ष विज्ञान और सौर मंडल की सालों से खोज कर रहे एक वरिष्ठ वैज्ञानिक ने कहा, “जांच लगभग चंद्रमा की सतह में डाले गए थर्मामीटर की तरह है। हमारा ध्यान ये समझने पर है कि चंद्रमा की ऊपरी सतह से नीचे की ओर जाने पर सतह में गर्मी कैसे बदलती है।"

भविष्य में चांद पर भेजे जाने वाले मानव मिशन के लिए मिलेगी मदद

भारतीय वैज्ञानिकों ने पेलोड को इंटीग्रेट करने में सालों बिताए हैं, जिससे शुरुआत में चंद्रयान-2 के दौरान डेटा इकट्ठा करने की उम्मीद थी। हालांकि, जब लैंडर दुर्घटनाग्रस्त हो गया, तो इसे चंद्रयान-3 पर ले जाने के लिए फिर से बनाया गया था। चंद्रमा पर भारत के तीसरे मिशन ने 23 अगस्त को साउथ पोल के पास उतरने वाला पहला अंतरिक्ष यान बनकर इतिहास रच दिया।

एक सीनियर साइंटिस्ट ने कहा, "चंद्रयान-3 का लैंडर 70 डिग्री दक्षिण में उतरा है। ये वहां से सामने आने वाला पहला ऐसा डेटा है। अगर हमें चंद्रमा की सतह पर अंतरिक्ष यात्रियों के लिए भविष्य का आधार विकसित करना है, तो हमें वहां की मिट्टी के बारे में सब कुछ जानना होगा। न केवल बनावट, बल्कि इसकी फिजिकल और थर्मल प्रॉपर्टी भी।

अब सभी वैज्ञानिक पेलोड एक्टिव होने के साथ, डेटा को डीप स्पेस एंटेना के जरिए ट्रांसमिट किया जा रहा है। जिसकी इंडियन डीप स्पेस नेटवर्क (IDSN) के साथ-साथ NASA और ESA समेत अंतरराष्ट्रीय एजेंसियां निगरानी कर रही हैं।

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ये डेटा नजदीकी भविष्य में चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव के पास मून बेस स्थापित करने में भी मदद करेगा। जबकि नेशनल एरोनॉटिक्स एंड स्पेस एडमिनिस्ट्रेशन (NASA) के नेतृत्व में पिछले कई मिशनों ने चांद की मिट्टी के गुणों को मापने की कोशिश की है, ये दक्षिणी ध्रुव से आने वाला पहला ऐसा निष्कर्ष है।

इस बीच, चंद्रयान-3 का रोवर चंद्रमा की सतह पर घूम रहा है, जिसके दो पेलोड डेटा इकट्ठा कर रहे हैं। रविवार को उसे अपनी जगह से तीन मीटर आगे चार मीटर डायमीटर वाला गड्ढा दिखा। भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) ने एक बयान में कहा, हालांकि, इसे सफलतापूर्वक रास्ते पर वापस लौटने का आदेश दिया गया और ये सुरक्षित रूप से एक नए रास्ते पर आगे बढ़ रहा है।

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