सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को एक बहुत ही अहम फैसला दिया है। कोर्ट ने फैसला दिया है कि CJI का ऑफिस RTI के तहत आता है। कोर्ट ने अपने फैसले में कहा कि चूंकि CJI ऑफिस एक पब्लिक अथॉरिटी है, ऐसे में यह RTI के दायरे में आता है। इस तरह सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में दिल्ली हाईकोर्ट के फैसले को बरकरार रखा है। दिल्ली HC ने CJI ऑफिस को RTI Act, 2005 की धारा 2(h) के तहत पब्लिक अथॉरिटी बताया था।
हालांकि, कोर्ट ने इस मामले में एक शर्त जरूर रखी है। जजों की बेंच ने कहा है कि किसी भी संस्था में पारदर्शिता होनी चाहिए, लेकिन इससे उसकी पवित्रता भंग नहीं होनी चाहिए। कोर्ट ने कहा- कोई भी अंधेरे में नहीं रहना चाहता, न ही किसी को अंधेरे में रखना चाहता है लेकिन सवाल यह है कि आप पारदर्शी के नाम पर किसी संस्थान को चोट नहीं पहुंचा सकते।
चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया रंजन गोगोई की अध्यक्षता में पांच जजों वाली बेंच ने यह फैसला सुनाया। बेंच के अन्य सदस्य जस्टिस एन वी रमण, जस्टिस डी वाई चंद्रचूड़, जस्टिस दीपक गुप्ता और जस्टिस संजीव खन्ना हैं।
बता दें कि दिल्ली हाईकोर्ट ने 2009 में फैसला सुनाया था कि सुप्रीम कोर्ट और सीजेआई ऑफिस भी उसी तरह आरटीआई की जवाबदेही के तहत आते हैं, जैसी बाकी दूसरी सार्वजनिक संस्थाएं। यह फैसला एक्टिविस्ट सुभाष चंद्रा अग्रवाल की याचिका पर आया था, जिन्होंने 2007 में जजों की संपत्ति की जानकारी के लिए आरटीआई दाखिल किया था, लेकिन उन्हें इसकी जानकारी नहीं दी गई।
अग्रवाल इसके खिलाफ Central Information Commission (CIC) पहुंचे, जिसने कहा कि उन्हें इसकी जानकारी दी जानी चाहिए। इस आदेश को दिल्ली हाईकोर्ट में ले जाया गया, जिसने अपना फैसला बरकरार रखा।