कोरोना वायरस संक्रमण ने पूरी दुनिया को अपनी चपेट में ले लिया है। इस संक्रमण का असर दिल, फेफड़ों पर तो होता ही है। अब एक नई स्टडी में खुलासा हुआ है कि इसका दिमाग पर भी गंभीर असर पड़ता है।
पहली बार कोविड-19 से पहले और बाद में दिमाग के स्कैन को स्टडी किया गया है। स्टडी में पाया गया है कि थोड़ी गंभीर बीमारी होने पर भी दिमाग पर असर देखा गया है।
जो लोग कोरोना संक्रमण से ठीक हुए हैं, उनमें ग्रे मैटर (grey matter) का काफी नुकसान हुआ है। जानकारों का मानना है कि ग्रे पदार्थ से नुकसान से मस्तिष्क को हानि हुई है। उसके सूंघने और स्वाद लेने की शक्ति कमजोर हुई है।
UK बायोबैंक (UK Biobank) ने महामारी की शुरुआत में 40,000 लोगों का ब्रेन स्कैन किया था। 2021 में इनमें से 782 को दोबारा बुलाया गया। वापस आए लोगों में से 394 कोरोना पॉजिटिव रह चुके थे। स्टडी में लोगों की उम्र, लिंग, स्थान जैसे मानकों का भी खयाल रखा गया। दिमाग की बनावट और काम करने की प्रक्रियाओं को स्कैन किया गया। नतीजों में दिमाग के कुछ हिस्से सिकुड़े पाए गए।
UK की स्टडी में यह बात सामने आई है कि ग्रे पदार्थ के नुकसान से इंसान के मस्तिष्क पर बहुत ही बुरा असर पड़ रहा है। उसके सूंघने की, स्वाद लेने की और अन्य तरह से महसूस करने की शक्ति कमजोर हो गई है। यह सब कोरोना संक्रमण के चलते हुआ है।
दिलचस्प बात यह सामने आई कि जिन कोरोना पॉजिटिव लोगों का स्कैन किया गया था, उनमें से सिर्फ कुछ इतने बीमार हुए थे कि उन्हें अस्पताल में भर्ती कराना पड़ा। यानी कि ऐसे लोगों के दिमाग पर भी ज्यादा असर पड़ा है जो अस्पताल में भर्ती कराने जितनी गंभीर हालत में नहीं पहुंचे थे।
बता दें कि कोरोना संक्रमित मरीज ठीक होने के बाद कई तरह की बीमारियों का सामना कर रहे हैं। जिसमें ब्लैक फंगस जैसे सबसे खतरनाक जानलेवा बीमारियां शामिल हैं। इसके अलावा कई तरह की मानसिक बीमारियां भी सामने आई हैं। जिनमें हाइपर टेंशन और डिप्रेशन जैसी मुख्य बीमारियां शामिल हैं।
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