Core Sector Output eases: जून महीने में भारत के कोर सेक्टर की वृद्धि दर घटकर 4 फीसदी पर आ गई है। पिछले महीने यह 6.4 फीसदी थी। वहीं, एक साल पहले की समान तिमाही में आठ कोर सेक्टरों में इंडस्ट्रियल प्रोडक्शन की दर 8.4 फीसदी थी। आठ कोर सेक्टर में कोयला, कच्चा तेल, प्राकृतिक गैस, रिफाइनरी प्रोडक्ट, फर्टिलाइजर, स्टील, सीमेंट और इलेक्ट्रिसिटी शामिल हैं। चालू वित्त वर्ष की अप्रैल-जून अवधि में कोर सेक्टर का उत्पादन 5.7 फीसदी बढ़ा, जबकि पिछले वित्त वर्ष की समान अवधि में यह 6 फीसदी की दर से बढ़ा था। आठ कोर सेक्टर इंडेक्स ऑफ इंडस्ट्रियल प्रोडक्शन (IIP) में 40.27 फीसदी का योगदान करते हैं।
भारतीय अर्थव्यवस्था के पिछले वित्तीय वर्ष की गति को आगे बढ़ाते हुए पहले के मुकाबले बेहतर प्रदर्शन करने की संभावना है। भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने हाल ही में भारत की ग्रोथ के पूर्वानुमान को पहले के 7 फीसदी से बढ़ाकर 7.2 फीसदी कर दिया है।
इंटरनेशनल मॉनेटरी फंड को भी उम्मीद है कि भारत अर्थव्यवस्था 7 फीसदी की दर से बढ़ेगी, जबकि पहले 6.8 फीसदी की वृद्धि का अनुमान लगाया गया था। 22 जुलाई को जारी आर्थिक सर्वे में 6.5-7 फीसदी की वृद्धि का अनुमान लगाया गया है। नेशनल काउंसिल ऑफ एप्लाइड इकोनॉमिक रिसर्च ने अपने मंथली इकोनॉमिक आउटलुक में कहा है कि मौजूदा वित्त वर्ष में ग्रोथ 7 फीसदी से अधिक हो सकती है।
NCAER की डायरेक्टर जनरल पूनम गुप्ता ने कहा, "हाई फ्रीक्वेंसी इंडिकेटर में मोमेंटम के आधार पर सामान्य मानसून, तुलनात्मक रूप से बेहतर ग्लोबल आउटलुक और भारत और दुनिया में चुनावी अनिश्चितता में कमी के कारण ग्रोथ रेट 7 फीसदी से अधिक और 7.5 फीसदी के करीब रहने की उम्मीद है।" सरकार ने 23 जुलाई को पेश बजट में अपने कैपिटल स्पेंडिंग के टारगेट को 11.11 लाख करोड़ रुपये पर बरकरार रखा है।