जीएसटी काउंसिल की 54वीं बैठक में 2 हजार रुपये से कम के लेन-देन पर पेमेंट एग्रीगेटर्स को हुई आय पर 18 फीसदी जीएसटी का मामला अहम माना जा रहा था। अब उत्तराखंड के वित्त मंत्री ने खुलासा किया कि इसे लागू करने के फैसले को स्थगित कर दिया गया है। उन्होंने बताया कि अब मामले को आगे की समीक्षा के लिए GST फिटमेंट कमेटी के पास वापस भेजा गया है। पेमेंट एग्रीगेटर्स ऐसे प्लेटफॉर्म होते हैं जिनके जरिए ऑनलाइन लेन-देन में सहूलियत हो गई है। ये व्यापारी और ग्राहकों के बीच इंटरमीडियएट की भूमिका निभाते हैं। जैसे कि पाइनलैब्स और रेजरपे जैसे पेमेंट एग्रीगेटर्स दुकानदारों को एक इंटरफेस मुहैया कराते हैं, जिससे डिजिटल पेमेंट की प्रक्रिया आसान हो जाती है। ये आरबीआई के नियमों के तहत काम करते हैं।
लेन-देन पर कितनी आय होती है पेमेंट गेटवेज को?
पेमेंट गेटवेज अभी हर लेन-देन पर दुकानदारों से 0.5 फीसदी से 2 फीसदी का चार्ज वसूलते हैं यानी कि ट्रांजैक्शन पर औसतन 1 फीसदी का चार्ज लगता है। इसी पर 18 फीसदी की दर से जीएसटी लगाने को लेकर बातचीत हो रही है। अभी ₹2,000 से कम के लेन-देन पर पेमेंट एग्रीगेटर्स को कोई जीएसटी नहीं देनी होती है। यह छूट 2017 में डिजिटल भुगतान को बढ़ावा देने के लिए पेश की गई थी, ताकि क्रेडिट या डिबेट कार्ड या और किसी पेमेंट कार्ड सर्विसेज के जरिए छोटे पेमेंट पर दुकानदारों पर जीएसटी का अतिरिक्त भार न पड़े।
फिर 18% जीएसटी का कैसे उठा मामला?
इससे पहले सीएनबीसी-टीवी18 को सूत्रों ने जानकारी दी थी फिटमेंट कमेटी इस पर 18 फीसदी की दर से जीएसटी की वकालत कर रही है और उसका कहना है कि इस फैसले से कंज्यूमर्स पर प्रत्यक्ष रूप से कोई असर नहीं पड़ेगा। हालांकि फिटमेंट कमेटी के मुताबिक एग्रीगेटर्स इसका भार दुकानदारों पर डाल सकते हैं जिससे ट्रांजैक्शन कॉस्ट बढ़ सकती है। सूत्रों के मुताबिक फिटमेंट कमेटी का मानना है कि पेमेंट एग्रीगेटर्स कानूनन बैंकिंग कंपनियां, वित्तीय संस्थान, या NBFCs नहीं हैं बल्कि वे मीडिएटर्स हैं। ऐसे में फिटमेंट कमेटी का तर्क है कि कानूनन सभी मीडिएटर्स पर जीएसटी देनदारी बनती है तो 2 हजार रुपये से कम के पेमेंट पर एग्रीगेटर्स पर इससे छूट नहीं दी जानी चाहिए।