भारत की खुदरा महंगाई दर (Retail Inflation Rate) अक्टूबर महीने में बढ़कर 4.48 पर्सेंट रही। सांख्यिकी और कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय (MoSPI) ने शुक्रवार को जारी आंकड़े में यह जानकारी दी। बता दें कि खुदरा महंगाई दर को कंज्यूमर प्राइस इंडेक्स (Consumer Price Index, संक्षेप में CPI) के जरिए मापा जाता है।
इससे पहले सितंबर महीने में खुदरा महंगाई दर 4.35 प्रतिशत थी। सरकारी आंकड़ों से पता चलता है कि खाद्य पदार्थों की कीमतों में तेजी के कारण अक्टूबर में खुदरा महंगाई दर में मामूली बढ़ोतरी हुई हुई। एक साल पहले यानी अक्टूर 2020 में, खुदरा महंगाई दर 7.61 प्रतिशत थी।
खुदरा महंगाई दर, लगातार चौथे महीने रिजर्व बैंक के 2 प्रतिशत से 6 प्रतिशत के कम्फर्ट जोन के भीतर रही है। RBI ने 2026 तक महंगाई दर को 4 प्रतिशत पर बनाए रखने का लक्ष्य रखा है। इसमें 2 फीसदी कम और ज्यादा का स्पेस दिया गया है।
लगातार चौथे महीने सीपीआई भारतीय रिजर्व बैंक के छह प्रतिशत मार्जिन से नीचे रहा है। भारत सरकार ने आरबीआई से कहा था कि वह मार्च 2026 तक पांच साल के लिए खुदरा मुद्रास्फीति दर को चार प्रतिशत पर दो प्रतिशत के ऊपरी और निचले मार्जिन के साथ बनाए रखे।
RBI ने मौजूदा वित्त वर्ष में खुदरा महंगाई दर के 5.3 पर्सेंट पर रहने का अनुमान जताया है, जबकि उसने दूसरी तिमाही में इसके 5.1 पर्सेंट रहने का अनुमान जताया था। RBI के अनुमानों के मुताबिक, तीसरी तिमाही में खुदरा महंगाई दर 4.5 पर्सेंट और चौथी तिमाही में 5.8 पर्सेंट रहा सकता है।
नेशनल स्टैटिस्टकल ऑफिस (NSO) की तरफ से जारी आंकड़ों के मुताबिक, अक्टूबर में खाद्य पदार्थों करीब 0.85 पर्सेंट महंगे रहुए, जबकि इसके पिछले महीने में यह दर 0.85 पर्सेंट थी।
मंत्रालय ने बताया कि ग्रामीण इलाकों के मुकाबले शहरी इलाकों में खुदरा महंगाई दर अधिक बढ़ी। ग्रामीण इलाकों में जहां खुदरा महंगाई दर 4.07 पर्सेंट रहा, वहीं शहरी इलाकों में यह 5.04 पर्सेंट रहा। इस तरह पूरे देश में खुदरा महंगाई दर 4.48 रही।
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