इंडिया में पिछले फाइनेंशियल ईयर (2021-22) में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (FDI) रिकॉर्ड ऊंचाई पर पहुंच गया। मिनिस्ट्री ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्ररी की तरफ से 29 जुलाई को FDI के डेटा जारी किए गए। इसमें कहा गया है कि पिछले वित्त वर्ष में देश में FDI 6 लाख करोड़ रुपये से ज्यादा रहा।
सरकार की तरफ से जारी आंकड़ों में कहा गया है, "इंडिया ने फाइंनेशियल ईयर 2021-22 में 6,31,050 करोड़ रुपये का रिकॉर्ड एफडीआई आया है।" मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर में एफडाई इक्विटी इनफ्लो बढ़कर 1,58,332 करोड़ रुपये पहुंच गया। इससे एक साल पहले यह 89,766 करोड़ रुपये था। यह 76 फीसदी ग्रोथ है।
सरकार ने कहा है, "एफडीआई पॉलिसी में रिफॉर्म्स की सरकार की कोशिशों के चलते देश में एफडीआई का प्रवाह बढ़ा है।" मई में सरकारी की तरफ से जारी डेटा में कहा गया था कि फाइनेंशियल ईयर 2020-21 में देश में 82.97 अरब डॉलर एफडीआई आया था।
इंडिया में सबसे ज्यादा एफडीआई सिंगापुर से आया। कुल एफडीआई में उसकी हिस्सेदारी 27 फीसदी रही। दूसरे नंबर पर अमेरिका रहा। उसकी हिस्सेदारी कुल एफडीआई में 18 फीसदी रही। मॉरीशस तीसरे नंबर पर रहा। उसकी हिस्सेदारी 16 फीसदी रही।
कंप्यूटर सॉफ्टवेयर और हार्डवेयर में सबसे ज्यादा एफडीआई आया। इसके बाद सर्विसेज सेक्टर और ऑटोमोबाइल इंडस्ट्री का स्थान रहा। वाणिज्य और उद्योग मंत्रालय ने कहा है कि एफडीआई अट्रैक्ट करने के लिए सरकार ने उदार और पारदर्शी नीति अपनाई है। स्ट्रैटेजिक महत्व के कुछ सेक्टर को छोड़ ज्यादातर सेक्टरर में ऑटोमैटिक रूट से 100 फीसदी एफडीआई की इजाजत है।
एफडीआई पॉलिसी की कुछ शर्तों के साथ मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर में ऑटोमैटक रूट से एफडीआई की इजाजत है।