COVID-19 महामारी से हुए नुकसान की भरपाई में लग सकते हैं 12 साल: आरबीआई रिपोर्ट

आरबीआई की रिसर्च टीम ने यह भी कहा है कि महामारी अभी खत्म नहीं हुई है। चीन, दक्षिण कोरिया और यूरोप समेत कई देशों में अभी भी कोरोना संक्रमण फैला हुआ है.

अपडेटेड Apr 30, 2022 पर 1:46 PM
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वित्त वर्ष 2020-21 की पहली तिमाही में जीडीपी में भारी गिरावट के बाद देश की इकोनॉमिक गतिविधियों में कोरोना की दूसरी लहर के पहले एक बार तेजी से गति आती दिखी थी लेकिन अप्रैल 2021-22 में कोरोना की दूसरी लहर ने इस गति पर विराम लगा दिया

रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया द्वारा जारी एक रिपोर्ट में कहा गया है कि COVID-19 महामारी से लगे झटके से उबरने के लिए भारतीय इकोनॉमी को एक दशक से ज्यादा का समय लग सकता है। भारत की इकोनॉमी पर कोविड -19 की वजह से पड़ी मार का विश्लेषण करने वाली इस रिपोर्ट में अनुमान लगाया गया है कि इस महामारी के कारण भारतीय इकोनॉमी को करीब 52 लाख करोड़ रुपये का झटका लगा है।

इस रिपोर्ट में आगे कहा गया है कि भारत को कोरोना से हुए नुकसान से निपटने में साल 2034-35 का समय लग सकता है। कोरोना की तीन लहरों के दौरान देश का उत्पादन घाटा 2020-21 में 19.1 लाख करोड़ रुपये, 2021-22 में 17.1 लाख करोड़ रुपये और 2022-23 में 16.4 लाख करोड़ रुपये रहने का अनुमान है।

इस रिपोर्ट में आगे कहा गया है कि कोरोना महामारी के दौरान फैली अव्यवस्था के चलते देश की इकोनॉमी की रिकवरी में असर देखने को मिला है। जीडीपी के तिमाही आंकड़ों में तिमाही आधार पर भारी उतार-चढ़ाव देखने को मिला है। वित्त वर्ष 2020-21 की पहली तिमाही में जीडीपी में भारी गिरावट के बाद देश की इकोनॉमिक गतिविधियों में कोरोना की दूसरी लहर के पहले एक बार तेजी से गति आती दिखी थी लेकिन अप्रैल 2021-22 में कोरोना की दूसरी लहर ने इस गति पर विराम लगा दिया।


इसी तरह जनवरी 2022 में कोरोना की तीसरी लहर का असर देखने को मिला और इसने रिकवरी की प्रक्रिया को चोट पहुंचाई। इस रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि रूस और यूक्रेन के बीच चल रहे युद्ध के कारण ग्लोबल और घरेलू दोनों इकोनॉमी के ग्रोथ डाउन ग्रेडिंग का खतरा है । इस युद्ध के कारण कमोडिटी की बढ़ती कीमतें और ग्लोबल सप्लाई चेन में आई दिक्कत घरेलू के साथ ग्लोबल इकोनॉमी को भी परेशान कर रही है।

आरबीआई की वित्त वर्ष 2021-22 के लिए मुद्रा एवं वित्त पर जारी रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि मौद्रिक एवं राजकोषीय नीति के बीच समय-समय पर संतुलन बनाए रखना टिकाऊ विकास की दिशा में पहला कदम होना चाहिए। हालांकि आरबीआई ने साफ किया है कि यह रिपोर्ट उसकी अपनी राय नहीं है बल्कि रिपोर्ट तैयार करने वाले लोगों के विचारों का प्रतिनिधित्व करती है।

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आरबीआई की रिसर्च टीम ने यह भी कहा है कि महामारी अभी खत्म नहीं हुई है। चीन, दक्षिण कोरिया और यूरोप समेत कई देशों में अभी भी कोरोना संक्रमण फैला हुआ है। हालांकि सभी देशों की अर्थव्यवस्थाएं अलग-अलग प्रतिक्रियाएं दे रही है।

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