सितंबर में मैन्युफैक्चरिंग PMI 56.2 से घटकर 55.1 पहुंची, लागत पर दबाव भी हुआ कम

S&P ग्लोबल का परचेजिंग मैनजेर्स इंडेक्स (PMI) अगस्त के 56.2 से घटकर 55.1 पर पहुंच गई है। जो 3 महीने के निचले पर पहुंच गई है

अपडेटेड Oct 03, 2022 पर 12:40 PM
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एनालिस्ट का मानना है कि एशिया की तीसरी सबसे बड़ी इकोनॉमी मानी जानी वाली भारतीय अर्थव्यवस्था इस साल पूरे विश्व में सबसे ज्यादा तेजी से बढ़ सकती है।

सितंबर महीने में भारत की मैन्यूफैक्चरिंग गतिविधियों में गिरावट देखने को मिला है। S&P ग्लोबल का परचेजिंग मैनजेर्स इंडेक्स (PMI) अगस्त के 56.2 से घटकर 55.1 पर पहुंच गई है। जो 3 महीने के निचले पर पहुंच गई है।

बता दें कि 50 के ऊपर की PMI रीडिंग कारोबारी गतिविधियों में विकास का संकेत होती है जबकि 50 के नीचे की PMI रीडिंग कारोबारी गतिविधियों में गिरावट का सूचक होती है।

एसएंडपी मार्केट इंटेलीजेंस की इकॉनोमिक्‍स एसोसिएट डायरेक्‍टर पॉलियाना डी लिमा ने कहा कि भारतीय विनिर्माण उद्योग (Manufacturing Sector) ठीक स्थिति में है भले ही वैश्विक स्‍तर पर कई बाधाएं हों या मंदी की आशंका हो। उन्‍होंने कहा कि सितंबर में नए ऑर्डर्स और उत्‍पादन में थोड़ी नरमी देखी गई लेकिन कुछ महत्‍वपूर्ण संकेतक इस बात की ओर इशारा करते हैं कि निकट भविष्‍य में उत्‍पादन में बढ़ोतरी होने वाली है।


दुनिया में मंदी को लेकर 2007 जैसी चिंता दिख रही, कंपनियों के सेल्स डेटा भी दे रहे रिस्क बढ़ने के संकेत

सितंबर 2022 के दौरान इनपुट कॉस्‍ट अक्‍टूबर 2020 के बाद से सबसे धीमी बढ़ोतरी देखी गई और कई कंपनियों ने खरीद मूल्‍य में किसी तरह की बढ़ोतरी न होने की बात भी कही। उन्होंंने आगे  कहा कि करेंसी रिस्‍क और कमजोर रुपये का महंगाई तथा ब्‍याज दर पर असर से अक्‍टूबर के दौरान प्रदर्शन उम्‍मीद के मुताबिक नहीं भी रह सकता है।

एनालिस्ट का मानना है कि एशिया की तीसरी सबसे बड़ी इकोनॉमी मानी जानी वाली भारतीय अर्थव्यवस्था इस साल पूरे विश्व में सबसे ज्यादा तेजी से बढ़ सकती है। लेकिन ग्लोबल और घरेलू स्तर पर आई रुपये की कमी, बाजार में आई उतार-चढ़ाव, रुस और यूक्रेन के युद्ध से विपरीत परिस्थितियों सामने आई है।

बतातें चलें कि भारतीय केंद्रीय बैंक ने पिछले हफ्ते इस साल के जीडीपी ग्रोथ का अनुमान 7.2 फीसदी से घटाकर 7 फीसदी कर दिया है। एसएंडपी ग्लोबल ने आगे कहा कि दो सालों में सितंबर में खरादारी की लागत सबसे धीमी गति से बढ़ी है। जबकि आउटपुट चार्ज इन्फ्लेशन सात महीनों के निचले स्तर पर आ गया है।

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