इस साल के अंत तक अमेरिका में हल्की मंदी दिख सकती है। इसकी वजह फेडरल रिजर्व की तरफ से इंटरेस्ट रेट में बढ़ोतरी है। वह इनफ्लेशन को कंट्रोल में करने के लिए इंटरेस्ट रेट बढ़ा रहा है। Nomura Holdings ने अपनी रिपोर्ट में यह अनुमान जताया है। इस रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि अगर दुनिया की सबसे बड़ी इकोनॉमी में गिरावट आती है तो मीडियम टर्म में इसका असर इंडिया पर पड़ सकता है।
नोमुरा के इकोनॉमिस्ट्स Aichi Amemiya और Robert Dent ने अपनी रिपोर्ट में लिखा है, "ग्रोथ की रफ्तार तेजी से घट रही है और फेड कीमतों में स्थिरिता लाने के लिए प्रतिबद्ध है। ऐसे में अनुमान है कि 2022 की चौथी तिमाही में हल्की मंदी की शुरुआत हो सकती है।"
रिपोर्ट में कहा गया है कि इनफ्लेशन का असर कंजम्प्शन की ग्रोथ पर पड़ रहा है। साथ ही वित्तीय स्थितियों में बदलाव भी ग्रोथ पर असर डाल रही हैं। इससे इंडिया में मीडियम टर्म में ग्रोथ में सुस्ती आने का संकेत मिलता है। नोमुरा ने कहा, "यूएस इकोनॉमिक्स की हमारी टीम ने 2022 की चौथी तिमाही में हल्की मंदी की बात कही है।"
उसने 2022 में इंडिया में जीडीपी की ग्रोथ 7.2 फीसदी और 2023 में 5.4 फीसदी रहने का अनुमान जताया है। रिपोर्ट में कहा गया है कि इनवेस्टमेंट और कंजम्प्शन बढ़ने की वजह से इंडियन इकोनॉमी कोविड-19 से पहले की स्थिति में आ रही है। इंडिया का सर्विस सेक्टर जो मार्च 2022 में कोविड से पहले के स्तर से 4 फीसदी नीचे चला गया था, अब उस स्तर से 40 फीसदी ऊपर जा चुका है।
गोल्डमैन सैक्स के अर्थशास्त्रियों ने भी अगले एक साल में इकोनॉमी के मंदी में जाने के अपने पहले के अनुमान में बदलाव किया है। अब उसे एक साल में मंदी की 30 फीसदी संभावना दिखाई देती है। पहले उसने इसकी 15 फीसदी संभावना जताई थी।
ब्लूमबर्ग ने जैन हैटिजस की अगुवाई में अर्थशास्त्रियों की एक टीम की तरफ से तैयार रिपोर्ट का हवाला दिया है। इसमें कहा गया है, "हमें अब रिसेशन का ज्यादा रिस्क दिखाई देता है। इसकी मुख्य वजह यह है कि हमारा Baseline Growth Path अब घटा है। हमारी चिंता यह है कि फेड इनफ्लेशन के ऊंचे स्तर को देखते हुए आक्रामक रुख दिखाएगा।"
BofA सिक्योरिटीज के इकोनॉमिस्ट्स ने भी अगले साल अमेरिकी इकोनॉमी के मंदी में जाने की करीब 40 फीसदी अनुमान जताया है। उनका कहना है कि अगले साल की दूसरी छमाही तक अमेरिका में जीडीपी ग्रोथ घटकर करीब शून्य रह जाएगी।