भारत सरकार के स्वामित्व वाली ऑयल एंड नैचुरल गैस कॉरपोरेशन (ONGC)ने केजी बेसिन में गहरे समुद्र वाली गैस खोज और हाई प्रेशर, हाई टेंपरेचर वाले ब्लॉकों में विदेशी कंपनियों को हिस्सेदारी का ऑफर रखा है। ओएनजीसी को मुश्किल क्षेत्रों में प्रोडक्सन के लिए वित्तीय और तकनीकी मदद की जरूरत है, इसी वजह से कंपनी की तरफ से ये ऑफर रखा गया है।
ONGC की कृष्णा गोदावरी बेसिन में KG-DWN-98/2 यानी KG-D5 ब्लॉक में 100 फीसदी हिस्सेदारी है। यह ब्लॉक रिलायंस इंडस्ट्रीज के KG-D6 क्षेत्र के बगल में स्थित है। ओएनजीसी ने कहा कि ब्लॉक में खोजों (discoveries)के तीन सेट हैं - उत्तरी भाग में क्लस्टर- I, क्लस्टर- II और दक्षिणी भाग में क्लस्टर- III।
ओएनजीसी ने दीन दयाल वेस्ट (डीडीडब्ल्यू) ब्लॉक के साथ ही केजी-डी5 ब्लॉक के क्लस्टर-3 में गहरे समुद्र में की गई खोजों के डेवलपमेंट में शामिल होने के लिए ‘‘अपेक्षित तकनीकी विशेषज्ञता और वित्तीय क्षमता’’ रखने वाली बड़ी ग्लोबल कंपनियों को आमंत्रित करते हुए एक शुरुआती टेंडर जारी किया है।
कंपनी द्वारा मंगाए गए टेंडर के मुताबिक, एक्सप्रेशन ऑफ इंटरेस्ट (ईओआई) 16 जून तक आमंत्रित किए गए हैं। ONGC ने केजी-डी5 ब्लॉक में 2850 मीटर (लगभग तीन किलोमीटर) की गहराई में गैस खोज की थी, जिसे यूडी-1 नाम दिया गया। इसके अलावा कंपनी ने अगस्त 2017 में गुजरात सरकार की कंपनी जीएसपीसी से डीडीडब्ल्यू ब्लॉक में 80 फीसदी हिस्सेदारी खरीदी थी। इसके लिए 7,738 करोड़ रुपये का भुगतान किया गया था।
ONGC के पास तट से लगभग 150 किलोमीटर दूर स्थित यूडी डिस्कवरी को डेवलप करने के लिए जरूरी टेक्नोलॉजी और विशेषज्ञता नहीं है। बता दें कि कंपनी को अपनी इसी कमजोरी के कारण डीडीडब्ल्यू ब्लॉक में ज्यादा सफलता नहीं मिली है, जिसमें उच्च दबाव और उच्च तापमान (एचपीएचटी) पर भारी भंडार है। टेंडर डॉक्यूमेंट में कहा गया है कि ओएनजीसी इन दोनों ब्लॉक के विकास के लिए टेक्नोलॉजी पार्टनर और सर्विस प्रोवाइडर की तलाश कर रही है और इच्छुक कंपनियों को इक्विटी हिस्सेदारी की देने को तैयार है। हालांकि कंपनी ने यह नहीं बताया है कि वह कितनी इक्विटी हिस्सेदारी ऑफर करेगी।