देश के आठ इंफ्रास्ट्रक्चर सेक्टर्स (Infrastructure Sectors) का आउटपुट मार्च 2023 में सालाना आधार पर 3.6 प्रतिशत की दर से बढ़ा, जो पांच महीनों में सबसे कम है। सरकार की तरफ से शुक्रवार को जारी आंकड़ों में ये जानकारी दी गई। एक साल पहले मार्च 2022 में इन कोर सेक्टर (Core Sectors) का आउटपुट 4.8 प्रतिशत की दर से बढ़ा था, जबकि फरवरी 2023 में इसका ग्रोथ रेट 7.2% था।
आंकड़ों से पता चलता है कि कोर सेक्टर का प्रोडक्शन अक्टूबर 2022 के बाद मार्च में सबसे कम रहा है। इससे पहले, अक्टूबर में इंफ्रास्ट्रक्चर सेक्टर का ग्रोथ रेट सबसे कम 0.7% रहा था।
वित्त वर्ष 2022-23 के आखिरी महीने मार्च में कच्चे तेल का प्रोडक्शन 2.8% गिरा जबकि पावर सेक्टर में 1.8% और सीमेंट में 0.8% की गिरावट दर्ज की गई।
दूसरी तरफ, कोयला उत्पादन (Coal Production) में 12.2 प्रतिशत की शानदार बढ़ोतरी हुई। इसी तरह फर्टिलाइजर सेक्टर 9.7 प्रतिशत, स्टील सेक्टर 8.8 प्रतिशत, नेचुरल गैस 2.8 प्रतिशत और रिफाइनरी प्रोडक्ट 1.5 प्रतिशत की दर से बढ़े।
समूचे वित्त वर्ष 2022-23 में इन आठों कोर इंडस्ट्री का ग्रोथ रेट 7.6 प्रतिशत रहा, जबकि वित्त वर्ष 2021-22 में इनका प्रोडक्शन 10.4 प्रतिशत बढ़ा था। इंफ्रस्ट्रक्चर इंडस्ट्री की ओवरऑल इंडेक्स ऑफ इंडस्ट्रियल प्रोडक्शन (IIP) में 40.27 प्रतिशत हिस्सेदारी होती है।
इसके अलावा रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) के आंकड़ों के अनुसार, देश का विदेशी मुद्रा भंडार (forex reserves) 21 अप्रैल को समाप्त हफ्ते में 2.16 अरब डॉलर घटकर 584.24 अरब डॉलर रह गया है।
क्या होते हैं कोर सेक्टर?
अर्थव्यवस्था की मुख्य या प्रमुख इंडस्ट्री को ही कोर सेक्टर कहा जाता है। भारत में 8 सेक्टर्स को कोर सेक्टर माना जाता है। भारतीय अर्थव्यवस्था के ये आठ-कोर सेक्टर हैं:
इन इंडस्ट्री का सामान्य आर्थिक गतिविधियों और औद्योगिक गतिविधियों पर भी बड़ा असर पड़ता है। वे ज्यादातर दूसरी इंडस्ट्री को भी महत्वपूर्ण रूप से प्रभावित करते हैं। कोर सेक्टर एक तरह से अर्थव्यवस्था का कैपिटल बेस होता है।
IIP में इन आठ इंडस्ट्री की संयुक्त हिस्सेदारी 40% से ज्यादा है। IIP एक तय समय के भीतर अर्थव्यवस्था के अलग-अलग सेक्टर और इंडस्ट्री ग्रुप की ग्रोथ रेट देता है।