दुनियाभर में जिस तरह इनफ्लेशन (Inflation) बढ़ा है, उससे केंद्रीय बैंकों (Central Banks) की भूमिका को लेकर बहस शुरू हो गई है। अमेरिका सहित दुनिया के कई केंद्रीय बैंक इनफ्लेशन का सही अंदाजा लगाने में नाकाम रहे। इसके बहुत ज्यादा बढ़ जाने पर उनके पास इंटरेस्ट रेट में आक्रामक वृद्धि के अलावा दूसरा विकल्प नहीं था।
RBI के पूर्व गवर्नर और मशहूर इकोनॉमिस्ट Raghuram Rajan ने कहा है कि अगर केंद्रीय बैंक सिर्फ इनफ्लेशन को कंट्रोल में करने पर अपना फोकस रखें तो इसके बहुत अच्छे नतीजे आएंगे।
रघुराम राजन ने न्यूज एजेंसी ब्लूमबर्ग को दिए एक इंटरव्यू में यह बात कही। उन्होंने कहा कि क्लाइमेंट चेंज और जॉब क्रिएशन जैसी जिम्मेदारियां पॉलिसी बनाने वाले लोग (सरकार) बेहतर तरीके से निभा सकते हैं। ये जिम्मेदारियां वैसे भी केंद्रीय बैंकों के लिए प्रायरिटी नहीं रही हैं।
आज अमेरिका, इंग्लैंड, इंडिया सहित दुनिया के कई देशों में केंद्रीय बैंक इनफ्लेशन को काबू में करने के लिए हर मुमकिन कोशिश कर रहे हैं। अमेरिका और इंग्लैंड में तो इनफ्लेशन ने उंचाई का कई दशकों का रिकॉर्ड तोड़ दिया है। कई चीजों के साथ आ जाने की वजह से इसने भयानक रूप हासिल कर लिया। इनमें बहुत ज्यादा उदार मॉनेटरी पॉलिसी, सप्लाई से जुड़ी समस्याएं और यूक्रेन पर रूस का हमला शामिल हैं।
जैक्सन होल सिंपोजियम के मौके पर राजन ने कहा, "आप केंद्रीय बैंकों की आलोचना इसके लिए कर सकते हैं कि उन्होंने इनफ्लेशन के खिलाफ कदम उठाने में थोड़ी देर कर दी, लेकिन यह कहना मुश्किल हैं कि वे इनफ्लेशन का अंदाजा लगाने में पूरी तरह गलत रहे।"
राजन ने कहा कि यह देखना सही होगा कि इनफ्लेशन में कमी आने पर इकोनॉमी की ग्रोथ कैसी रहती है। लेकिन, फेडरल रिजर्व के रेट में कमी करने के लिए जरूरी है कि अप्रैल तक मंदी चरम पर पहुंच जाए। दुनियाभर के इनवेस्टर्स की नजरें जैक्सन होल सिंपोजियम पर लगी है। इसमें फेडरल रिजर्व के चेयरमैन जेरोम पॉवेल मॉनेटरी पॉलिसी को लेकर तस्वीर साफ करेंगे।
इनफ्लेशन को काबू में करने के लिए अमेरिका के केंद्रीय बैंक फेडरल रिजर्व ने मार्च से अब तक इंटरेस्ट रेट 2.25 फीसदी बढ़ाया है। इधर, इंडिया में RBI ने मई से अब तक इंटरेस्ट रेट में 1.40 फीसदी वृद्धि कर चुका है। इसका मकसद इनफ्लेशन को जल्द से जल्द काबू में लाना है।