भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) की मौद्रिक नीति समिति या मॉनिटरी पॉलिसी कमेटी (MPC) की अगले वित्त वर्ष 2022-23 में छह बैठकें होंगी। पहली बैठक 6-8 अप्रैल को होगी। मॉनिटरी पॉलिसी कमेटी (MPC) की बैठकें RBI के गवर्नर की अध्यक्षता में होती है और इसी बैठक में RBI रेपो रेट सहित मॉनिटरी पॉलिसी से जुड़े अन्य अहम दरों को तय करता है।
मॉनिटरी पॉलिसी कमेटी (MPC) घरेलू और आर्थिक स्थितियों पर विचार-विमर्श करके बाद द्विमासिक मॉनिटरी पॉलिसी का ऐलान करती है। RBI ने बुधवार 30 मार्च को मॉनिटरी पॉलिसी कमेटी (MPC) की बैठक से जुड़े कार्यक्रम का ऐलान किया। इसके मुताबिक वित्त वर्ष 2022-23 के लिए MPC की पहली द्विमासिक बैठक 6 से 8 अप्रैल के बीच होगा। वहीं दूसरी बैठक छह से आठ जून को होगी।
कार्यक्रम के मुताबिक, तीसरी, चौथी और पांचवी बैठकें क्रमश: 2-4 अगस्त, 28-30 सितंबर और 5-7 दिसंबर के बीच होंगी। समिति की छठी और वित्त वर्ष की आखिरी बैठक 6-8 फरवरी 2023 को होगी। MPC में कुल छह सदस्य होते हैं। इसमें RBI के गवर्नर के अलावा केंद्रीय बैंक के दो प्रतिनिधि और तीन बाहरी सदस्य होते हैं।
MPC बैठक को लेकर क्या है नियम?
RBI एक्ट के मुताबिक, मॉनिटरी पॉलिसी कमेटी (MPC) के लिए साल में चार बैठक करना अनिवार्य है। साथ ही RBI को वित्त वर्ष शुरू होने से पहले ही इस बैठक को लेकर कैलेंडर जारी करना होता। RBI कैलेंडर के मुताबिक, वित्त वर्षअ 2023 के लिए MPC की पहली बैठक अगले हफ्ते होगी।
RBI अगले हफ्ते एमपीसी के प्रस्ताव के साथ अपनी छह-मासिक मॉनिटरी पॉलिसी रिपोर्ट जारी करेगा। मॉनिटरी पॉलिसी रिपोर्ट में केंद्रीय बैंक के महंगाई से जुड़े पूर्वानुमानों और उन पर आधारित धारणाओं के बारे में जानकारी दी जाएगी, जिस पर सभी की करीबी निगाह होगी। साथ ही यह भी देखना होगा कि RBI कच्चे तेल की कीमत अगले वित्त वर्ष में कितने डॉलर प्रति बैरल रहने का अनुमान जताती है।