RBI के इंटरेस्ट रेट बढ़ाने के बाद जानिए कितनी हो जाएगी आपकी EMI

RBI ने इंटरेस्ट रेट (Repo Rate) 0.50 फीसदी बढ़ा दिया है। इसकी उम्मीद पहले से की जा रही थी। मई से इंटरेस्ट रेट में यह चौथी वृद्धि है। इसकी वजह यह है कि इनफ्लेशन अब भी केंद्रीय बैंक के टारगेट से ज्यादा है। इसलिए RBI ने फिलहाल महंगाई को काबू में करने पर अपना फोकस बनाए रखा है

अपडेटेड Sep 30, 2022 पर 11:27 AM
RBI गवर्नर शक्तिकांत दास ने रेपो रेट बढ़ाने का संकेत पहले ही दे दिया था।

RBI ने इंटरेस्ट रेट (Repo Rate) 0.50 फीसदी बढ़ा दिया है। इसकी उम्मीद पहले से की जा रही थी। मई से इंटरेस्ट रेट में यह चौथी वृद्धि है। इसकी वजह यह है कि इनफ्लेशन अब भी केंद्रीय बैंक के टारगेट से ज्यादा है। इसलिए RBI ने फिलहाल महंगाई को काबू में करने पर अपना फोकस बनाए रखा है। अमेरिका सहित दुनिया के कई बड़े देशों में केंद्रीय बैंक इंटरेस्ट रेट बढ़ा रहे हैं।

RBI गवर्नर शक्तिकांत दास ने 30 सितंबर (शुक्रवार) को सुबह 10 बजे रेपो रेट बढ़ाने का ऐलान किया। उन्होंने कहा कि रेपो रेट में 0.50 फीसदी बढ़ोतरी के प्रस्ताव पर मॉनेटरी पॉलिसी कमेटी (MPC) के छह सदस्यों में से 5 ने सहमति जताई। उन्होंंने कहा कि केंद्रीय बैंक ने Accommodative Policy वापस लेने का फैसला किया है।

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इंटरेस्ट रेट बढ़ने से बैंकों से लोन लेना महंगा हो जाएगा। इससे घर, कार सहित सभी लोन पर आपकी EMI बढ़ जाएगी। बैंक लोन का इंटरेस्ट रेट तय करने करने के लिए रेपो रेट को बतौर बेंचमार्क इस्तेमाल करते हैं। इसलिए रेपो रेट बढ़ने पर लोन का इंटरेस्ट रेट बढ़ जाता है। रेपो रेट घटने पर लोन का इंटरेस्ट रेट घट जाता है।

RBI के रेपो रेट बढ़ाने का असर नए और पुराने दोनों ग्राहकों पर पड़ेगा। जिन लोगों ने फ्लोटिंग रेट पर होम लोन लिए हैं, उनकी EMI बढ़ जाएगी। कार, पर्सनल सहित दूसरे तरह के लोन लेना भी महंगा हो जाएगा। इसे हम एक उदाहरण से समझ सकते हैं।

मान लीजिए किसी व्यक्ति ने 50 लाख रुपये का होम लोन लिया है। इस लोन की अवधि 20 साल साल है। पहले इस लोन का इंटरेस्ट रेट 8.12 फीसदी था। अब यह बढ़कर 8.62 फीसदी हो जाएगा। इससे लोन की अवधि 2 साल 3 महीने बढ़ जाएगी। इस वजह से उसे इंटरेस्ट के रूप में अतिरिक्त 11 लाख रुपये का पेमेंट करना पड़ेगा। यह तब होगा जब आपकी EMI पहले जैसे बनी रहेगी।

आपके सामने दूसरा ऑप्शन EMI बढ़ाकर लोन के पीरियड को अपरिवर्तित रखना होगा। इसे एक उदाहरण की मदद से समझा जा सकता है। मान लीजिए किसी व्यक्ति ने 50 लाख रुपये का लोन 20 साल के लिए लिया है। पहले इस लोन का इंटरेस्ट रेट 8.12 था। इससे अब तक उसकी EMI 42,196 रुपये थी। रेपो रेट में 0.50 फीसदी वृद्धि के बाद लोन का इंटरेस्ट रेट बढ़कर 8.62 फीसदी हो जाएगा। इससे EMI बढ़कर 43,771 रुपये हो जाएगी। इस तरह हर महीने उसकी EMI 967 रुपये बढ़ जाएगी।

रेपो रेट बढ़ने के बाद कार लोन की EMI भी बढ़ जाएगी। मान लीजिए कि आपने 10 लाख रुपये का कार लोन 5 साल के लिए लिया है। मान लीजिए इसका इंटरेस्ट रेट 8.5 फीसदी था। आपकी EMI पहले हर महीने 20,516 रुपये आ ही थी। अब इंटरेस्ट रेट 9 फीसदी हो जाएगी। इससे आपकी EMI बढ़कर 20,758 रुपये हो जाएगी।

आपके लिए यह ध्यान में रखना जरूरी है कि ऊपर सिर्फ उदाहरण दिया गया है। आपके होम लोन और कार लोन की असल EMI इस बात पर निर्भर करेगी कि पहले आपके बैंक ने इंटरेस्ट रेट कितना रखा था। इस बात से भी असर पड़ेगा कि आपका बैंक रेपो रेट बढ़ने के बाद इंटरेस्ट रेट में कितनी बढ़ोतरी करता है। आम तौर पर बैंक रेपो रेट बढ़ने पर होम लोन की EMI बढ़ाने की जगह लोन का पीरियड बढ़ा देते हैं।

RBI की मॉनेटरी पॉलिसी कमेटी (MPC) की बैठक 28 सितंबर यानी बुधवार को शुरू हुई थी। इसके नतीजे 30 सितंबर यानी शुक्रवार को आए। केंद्रीय बैंक की तरफ से रेपो रेट में यह लगातार चौथी वृद्धि है। इससे रेपो रेट बढ़कर 5.90 फीसदी पर पहुंच गया है।

इससे पहले रेपो रेट 5.40 फीसदी पर था। वृद्धि के बाद यह 5.90 फीसदी पर पहुंच गया, जो अप्रैल 2019 के बाद सबसे ज्यादा रेपो रेट है। इस साल मई से अब तक RBI रेपो रेट 1.40 फीसदी बढ़ा चुका है। RBI यह स्पष्ट कर चुका है कि फिलहाल उसकी प्राथमिकता महंगाई को काबू में करना है। अगस्त में रिटेल इनफ्लेशन फिर से 7 फीसदी पर पहुंच गया। जुलाई में इसमें थोड़ी नरमी देखने को मिली थी। तब यह 6.71 फीसदी था।

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