लोकसभा चुनाव से पहले अप्रैल महीने में खुदरा महंगाई में पिछले महीने के मुकाबले मामूली गिरावट आई है। अप्रैल महीने में खुदरा महंगाई दर गिरकर 4.83 फीसदी पर आ गई है। इसके पहले मार्च में कंज्यूमर प्राइस इंडेक्स (CPI) इन्फ्लेशन 10 महीने के निचले स्तर 4.85 फीसदी पर था। ये आंकड़े आज 13 मई को भारत सरकार ने जारी किए हैं। हालांकि, अप्रैल महीने में खुदरा महंगाई दर अर्थशास्त्रियों के अनुमान से थोड़ा अधिक है। मनीकंट्रोल द्वारा कराए गए सर्वे में 4.80 फीसदी के CPI इन्फ्लेशन का अनुमान लगाया गया था। भले ही अप्रैल में महंगाई 11 महीने के निचले स्तर पर आ गई, लेकिन यह लगातार 55वां महीना होगा जब यह आरबीआई के चार फीसदी के मीडियम टर्म टारगेट से ऊपर होगी।
Retail inflation में गिरावट की ये है वजह
रसोई में इस्तेमाल होने वाली कई वस्तुओं के दाम घटने से अप्रैल में खुदरा मुद्रास्फीति मामूली घटकर 4.83 फीसदी पर आ गई। राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय (NSO) द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार, अप्रैल में खाने-पीने की चीजों की खुदरा महंगाई मामूली बढ़ोतरी के साथ 8.70 फीसदी रही। एक महीने पहले मार्च में यह 8.52 फीसदी के स्तर पर थी।
मांस और मछली की कीमतें एक महीने पहले के 6.36 फीसदी के मुकाबले 8.17 फीसदी और फलों की कीमतें मार्च में 3.07 फीसदी के मुकाबले 5.22 फीसदी पर रही। इस बीच, सब्जियों और दालों में मामूली गिरावट का रुख देखा गया।
सरकार ने खुदरा महंगाई को दो फीसदी की घट-बढ़ के साथ 4 फीसदी पर रखने का लक्ष्य भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) को दिया हुआ है। केंद्रीय बैंक अपनी द्विमासिक मौद्रिक समीक्षा में ब्याज दरें तय करते समय रिटेल इन्फ्लेशन के आंकड़ों पर गौर करता है। रिजर्व बैंक का कहना है कि आगे चलकर खाने-पीने की चीजों के दाम इन्फ्लेशन के रुख को प्रभावित करते रहेंगे।