सेट्रल बोर्ड ऑफ इनडायरेक्ट टैक्सेज एंड कस्टम्स (CBIC) ने फर्जी इनपुट टैक्स क्रेडिट (ITC) के खिलाफ राष्ट्रव्यापी अभियान में 26,543 करोड़ रुपये की जीएसटी चोरी पकड़ी है। जीएसटी काउंसिल के सूत्रों के मुताबिक, CBIC के अधिकारियों ने 16 अगस्त से 68,903 हाई रिस्क टैक्सपेयर्स की जांच-पड़ताल की, जिनमें से तकरीबन 27 पर्सेंट यानी 18,472 इकाइयों का वजूद ही नहीं था।
एक सूत्र ने मनीकंट्रोल को बताया, 'दूसरे अभियान में पकड़ी गई टैक्स चोरी 26,543 करोड़ रुपये है। तकरीबन 27 पर्सेंट इकाइयां फर्जी पाई गईं। गड़बड़ी के सबसे ज्यादा मामले महाराष्ट्र, गुजरात और दिल्ली में पाए गए हैं।' बड़े पैमाने पर टैक्स चोरी के मामले पाए जाने के बावजूद इसकी रिकवरी काफी मुश्किल है। उन्होंने कहा, 'कई मामलों में फ्रॉड का पता चलने से पहले ही ITC का इस्तेमाल कर लिया गया। ऐसे में रिकवरी की संभावना सीमित हो जाती है, बेशक फर्जी इकाइय का औसत फ्रॉड 1.5 करोड़ रुपये का है।'
इस फर्जीवाड़े को लेकर दूसरे अभियान के नतीजे 21 दिसंबर को होने वाली जीएसटी काउंसिल की बैठक में पेश किए जाएंगे। एक अन्य सूत्र ने मनीकंट्रोल को बताया कि काउंसिल की बैठक में जीएसटी कंप्लायंस को मजबूत बनाने और फर्जी इनवॉइसिंग और ITC फ्रॉड के खिलाफ रेगुलेशंस को और सख्त करने से जुड़े उपायों पर चर्चा की जाएगी।
शुरुआती लिस्ट में कुल 74,070 टैक्सपेयर्स को जोखिमपूर्ण बताया गया था और इनमें से 5,000 टैक्सपेयर्स की पड़ताल बाकी है। ऐसे टैक्सपेयर्स मुख्य तौर पर दिल्ली और महाराष्ट्र से हैं। महाराष्ट्र में 765 जांच अभी पेंडिंग हैं, जबकि सिर्फ दिल्ली में अब तक 3,300 मामलों की जांच की जानी बाकी है। सूत्र ने बताया, 'महाराष्ट्र में जांच में हुई देरी की वजह विधानसभा चुनाव हैं।' यह इनपुट टैक्स क्रेडिट फ्रॉड के खिलाफ दूसरा प्रमुख अभियान है। CBIC ने पहले चरण में 14 मई से 14 जुलाई के दौरान स्पेशल जांच की थी। इसके तहत 77,200 इकाइयों की जांच की गई थी।