Ram Mandir Daan Chori: दान पेटी से बैंक तक... राम मंदिर में कैसे होती है हर 1 रुपये की गिनती और निगरानी?

Ram Mandir Donation Scam: SIT अब यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि इतनी कड़ी सुरक्षा और कई स्तरों की निगरानी के बावजूद अगर कोई गड़बड़ी हुई है तो वो किस चरण में हुई। जांच का मुख्य फोकस यह है कि कहीं मानवीय लापरवाही, रिकॉर्ड में हेरफेर या निगरानी की किसी कमजोरी का फायदा तो नहीं उठाया गया

अपडेटेड Jun 20, 2026 पर 7:38 PM
Ram Mandir Daan Chori: दान पेटी से बैंक तक... राम मंदिर में कैसे होती है हर 1 रुपये की गिनती और निगरानी? फिर कैसे हो गई 'चोरी'!

अयोध्या के राम मंदिर में कथित दान घोटाले की जांच के बीच लोगों के मन में यह सवाल उठ रहा है कि आखिर मंदिर में आने वाले करोड़ों रुपये, सोना-चांदी और कीमती सामान की गिनती और निगरानी कैसे होती है।

हर दिन एक लाख से ज्यादा श्रद्धालु रामलला के दर्शन के लिए पहुंचते हैं और बड़ी मात्रा में नकद, सोना, चांदी और दूसरी कीमती वस्तुएं दान करते हैं। इन सभी दानों को सुरक्षित रखने और उनका हिसाब-किताब रखने के लिए एक बेहद सख्त और कई लेवल की व्यवस्था बनाई गई है।

35 दान पेटियों से शुरू होती है प्रक्रिया


मंदिर परिसर में कुल 35 बड़ी स्टील की दान पेटियां लगाई गई हैं। इन पर 24 घंटे CCTV कैमरों से निगरानी रखी जाती है।

इन दान पेटियों में डबल-लॉक सिस्टम होता है, यानी किसी एक व्यक्ति के पास इन्हें खोलने का अधिकार नहीं होता। जब कोई पेटी भर जाती है, तो ट्रस्ट के अधिकारी और बैंक प्रतिनिधि की मौजूदगी में उसे खोला जाता है।

इसके बाद दान की रकम और अन्य सामग्री को विशेष सुरक्षा वाले सीलबंद बैग में रखकर सेंट्रल काउंटिंग रूम में भेजा जाता है।

दो शिफ्ट में होती है गिनती

उच्च सुरक्षा वाले काउंटिंग रूम में सुबह से रात तक दो शिफ्ट में काम चलता है। इस प्रक्रिया में करीब 40 पेशेवर कैश टेलर, नेशनलाइज बैंकों के अधिकारी और ऑडिटर शामिल रहते हैं।

पहली शिफ्ट में:

  • नोटों को मूल्य के हिसाब से अलग किया जाता है।
  • मुड़े-तुड़े नोट सीधे किए जाते हैं।
  • खराब या कटे-फटे नोटों को अलग रखा जाता है।

दूसरी शिफ्ट में:

  • नोटों को हाई-स्पीड कैश काउंटिंग मशीनों से गिना जाता है।
  • नकली नोटों की जांच की जाती है।
  • पूरी प्रक्रिया कैमरों की निगरानी में होती है।
  • सोना-चांदी का अलग हिसाब

नकदी के अलावा श्रद्धालुओं की ओर से दान किए गए सोने के आभूषण, चांदी के सिक्के और दूसरी कीमती चीजों की जांच अलग टीम करती है।

सरकार की मान्यता प्राप्त मूल्यांकन विशेषज्ञ (Appraisers) इन वस्तुओं का वजन और मूल्य दर्ज करते हैं। इसके बाद उन्हें मंदिर के सुरक्षित अंडरग्राउंड वॉल्ट (तिजोरी) में रखा जाता है।

बैंक में जमा होने से पहले कई लेवल की जांच

दिनभर की गिनती पूरी होने के बाद नकद राशि का मिलान किया जाता है।

  • मशीनों के रिकॉर्ड और वास्तविक नकदी का आंकड़ा मिलाया जाता है।
  • सभी रिकॉर्ड की जांच होती है।
  • ट्रस्ट और वित्तीय एजेंसियों के प्रतिनिधि दस्तावेजों पर संयुक्त हस्ताक्षर करते हैं।

इसके बाद रकम को सुरक्षा व्यवस्था के बीच बैंक पहुंचाया जाता है और मंदिर ट्रस्ट के आधिकारिक खातों में जमा किया जाता है।

डिजिटल रसीद मिलने के बाद ही होता है अंतिम रिकॉर्ड

बैंक से डिजिटल रसीद मिलने के बाद ही राशि को ट्रस्ट के केंद्रीय लेखा-जोखा (Accounting System) में स्थायी रूप से दर्ज किया जाता है।

जांच एजेंसियां क्या देख रही हैं?

SIT अब यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि इतनी कड़ी सुरक्षा और कई स्तरों की निगरानी के बावजूद अगर कोई गड़बड़ी हुई है तो वो किस चरण में हुई। जांच का मुख्य फोकस यह है कि कहीं मानवीय लापरवाही, रिकॉर्ड में हेरफेर या निगरानी की किसी कमजोरी का फायदा तो नहीं उठाया गया।

फिलहाल जांच जारी है और एजेंसियां पूरी वित्तीय प्रक्रिया की बारीकी से समीक्षा कर रही हैं।

राम मंदिर दान घोटाले में बड़ी कार्रवाई की तैयारी? चंपत राय के करीबी टिन्नू यादव की हो सकती है गिरफ्तारी!

 

हिंदी में शेयर बाजार स्टॉक मार्केट न्यूज़,  बिजनेस न्यूज़,  पर्सनल फाइनेंस और अन्य देश से जुड़ी खबरें सबसे पहले मनीकंट्रोल हिंदी पर पढ़ें. डेली मार्केट अपडेट के लिए Moneycontrol App  डाउनलोड करें।