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सरकारी बैंकों के प्राइवेटाइजेशन के लिए बैंकिंग लॉ में होगा बदलाव, शीतकालीन सत्र में पारित होगा बिल

सरकार संसद के शीतकालीन सत्र में 2 सरकारी बैंकों के प्राइवेटाइजेशन के लिए बैंकिंग लॉ में बदलाव का प्रस्ताव लाने की तैयारी में है।

MoneyControl Newsअपडेटेड Nov 24, 2021 पर 10:24 AM
सरकारी बैंकों के प्राइवेटाइजेशन के लिए बैंकिंग लॉ में होगा बदलाव, शीतकालीन सत्र में पारित होगा बिल

बाजार का फोकस आज सरकारी बैंकों पर बना हुआ है। सरकार संसद के शीतकालीन सत्र में 2 सरकारी बैंकों के प्राइवेटाइजेशन के लिए बैंकिंग लॉ में बदलाव का प्रस्ताव लाने की तैयारी में है। अगले हफ्ते से शुरू होने वाले संसद के शीतकालीन सत्र में यह बिल पेश किया जाएगा। इसके लिए बैंकिंग कंपनीज एक्ट 1970 और 1980 में बदलाव होगा।

बता दें कि इन दोनों कानूनों के जरिए ही बैंकों का राष्ट्रीयकरण किया गया था। अब बैंकों के प्राइवेटाइजेशन के लिए इस एक्ट में जरुरी बदलाव किया जाएगा।

शीतकालीन सत्र में ही बिल पारित कराने का भी प्रस्ताव है। इस सत्र में कुल 26 बिल पेश होगे। इन बैंकों का प्राइवेटाइजेशन हो सकता है इसपर नजर डालें तो पहले चरण में Indian Overseas Bank और central Bank of India शामिल हो सकते है। नीति आयोग ने Indian Overseas Bank और central Bank of India में हिस्सेदारी बेचने की सिफ़ारिश की है। पहले चरण में सरकार इनमें अपनी 51 फीसदी तक हिस्सेदारी बेच सकती है।

संसद के शीतकालीन सत्र में जिन बिलों को पेश किया जा सकता है उसमें क्रिप्टो करेंसी रेगुलेशन बिल भी शामिल है। सरकार इसमें प्राइवेट क्रिप्टोकरेंसी पर बैन का एलान कर सकती है और आरबीआई अपनी डिजिटल करेंसी लॉन्च कर सकता है। कुछ प्राइवेट करेसियों को भी छूट मिल सकती है। इसके साथ ही यह भी माना जा रहा है कि सरकार ब्लॉक चेन टेक्नोलॉजी को बैन नहीं करेगी।

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