Ukraine war : भारतीयों ने अब वनस्पति तेल (vegetable oil) और फ्यूल जमा करना शुरू कर दिया है और पेट्रोल-डीजल की भी ज्यादा खरीदारी कर रहे हैं। दरअसल, यूक्रेन पर रूस के हमले के चलते एडिबल ऑयल की कमी की आशंकाएं मजबूत हो गई हैं, वहीं प्रमुख राज्यों में चुनाव खत्म हो गए हैं और ग्लोबल मार्केट में क्रूड की कीमतों में मजबूती के चलते सरकार पेट्रोल-डीजल की कीमतें बढ़ा सकती है।
मुंबई की एक हाउसवाइफ रेखाना खान ने कहा, “वाट्सऐप पर, मैंने एक मेसेज पढ़ा था कि युद्ध के चलते कुकिंग ऑयल की कमी हो सकती है। इसलिए, खरीदारी के लिए निकल पड़ी।” उन्होंने 10 लीटर एडिबल ऑयल (edible oil) खरीदा, जो उसकी 5 लीटर की मासिक खपत से दोगुना है।
एडिबल ऑयल के लिए इम्पोर्ट पर निर्भर भारत
एक महीने से कम समय में इडिबिल ऑयल (edible oil) की कीमतें 20 फीसदी से ज्यादा उछल चुकी हैं और कीमतों में इस तरह की तेजी के बीच वाट्सऐप पर फेक मैसेजेस के चलते लोग ज्यादा खरीदारी कर रहे हैं और घरों में जमा कर रहे हैं। भारत एडिबल ऑयल (edible oil) के मामले में बहुत हद तक इम्पोर्ट पर निर्भर करता है। भारत की दो-तिहाई एडिबल ऑयल की जरूरत इम्पोर्ट से पूरी होती हैं।
रूस और यूक्रेन से आता है सनफ्लावर ऑयल
सनफ्लावर ऑयल के मामले में भारत इसके लिए लगभग पूरी तरह से रूस और यूक्रेन पर निर्भर है। भारत में होने वाले सनफ्लावर ऑयल के कुल इम्पोर्ट का 90 फीसदी से ज्यादा इन्हीं दो देशों से आता है। वहीं एडिबल ऑयल इम्पोर्ट में सनफ्लॉवर की हिस्सेदारी 14 फीसदी है।
घबराने ने की जरूरत नहीं : एक्सपर्ट
हालांकि एक्सपर्ट मानते हैं कि घबराने की कोई जरूरत नहीं है, क्योंकि अगर कोई किल्लत होगी तो वह सिर्फ सनफ्लावर ऑयल की होगी। सॉल्वेंट एक्सट्रैक्टर्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया के एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर बीवी मेहता ने कहा, 'अन्य सभी एडिबल ऑयल जैसे पॉम ऑयल, सोया तेल, सरसों तेल, मूंगफली तेल आदि की आपूर्ति में कोई दिक्कत नहीं है। इस कारण ज्यादा खरीदारी करने की कोई जरूरत नहीं है।'
महंगे हो सकते हैं पेट्रोल-डीजल
वहीं सरकारी तेल कंपनियों का पेट्रोल-डीजल पर कंट्रोल है। कई प्रमुख राज्यों में चुनाव के चलते 4 नवंबर से तेल की कीमतें नहीं बढ़ाई गई हैं।
अब 7 मार्च को इन राज्यों में मतदान संपन्न होने के बाद, कंज्यूमर्स को आशंका है कि सरकार जल्द से जल्द तेल के दाम बढ़ा सकती है।
महाराष्ट्र के किसान ने बताया कि उसने डीजल जमा कर लिया है, क्योंकि मीडिया में इलेक्शन के बाद फ्यूल की कीमतों में 15-20 रुपये लीटर की बढ़ोतरी की खबरें आ रही हैं।