विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (University Grants Commission-UGC) नई एजुकेशन पॉलिसी के तहत एक बड़ा फैसला लिया है। अब रिसर्च इंस्टीट्यूट्स और हायर एजुकेशन प्रोग्राम्स में रिसर्च इंटर्नशिप जरूरी होगी। इसके लिए UGC ने फैकल्टी मेंबर्स औऱ रिसर्चर्स के साथ मिलकर गाइडलाइंस बनाई है। चार साल के डिग्री कोर्स में दूसरे और चौथे सेमेस्टर में छात्रों को इंटर्नशिप करना जरूरी होगा। यह इंटर्नशिप दो तरह की होगी। एक इंटर्नशिप में छात्रों को रोजागार हासिल करने में मदद मिलेगी। जबकि दूसरी इंटर्नशिप में रिसर्च में मदद मिलेगी।
UGC ने जो 4 साल के डिग्री प्रोग्राम के लिए पहली रिसर्च इंटर्नशिप पॉलिसी का ड्रॉफ्ट तैयार का है, इसे ड्रॉफ्ट गाइडलाइन फॉर रिसर्च इंटर्नशिप विद फैकल्टी एंड रिसर्चर्स ऐट हायर एजुकेशन इंस्टीट्यूशन्स/रिसर्च इंस्टी्टयूशन्स का नाम दिया गया है।
जानिए क्या है नई गाइडलाइन
पहले साल के बाद अगर कोर्स छोड़ना पड़ता है और आपने 8-10 हफ्ते की इंटर्नशिप की है तो आपको सर्टिफिकेट मिलेगा। इसके 10 क्रेडिट पॉइंट्स होंगे। दो साल बाद कोर्स छोड़ने पर डिप्लोमा मिलेगा। इसमें भी 8-10 हफ्ते की इंटर्नशिप जरूरी होगी और 10 क्रेडिट पॉइंट्स मिलेंगे। वहीं 7वें सेमेस्टर यानी चौथे साल में भी 10 हफ्ते की इंटर्नशिप जरूरी होगी। इस तरह से 4 साल के डिग्री प्रोग्राम में 40 क्रेडिट होना चाहिए।
इंटर्नशिप के लिए छात्र खुद भी अप्लाई कर सकते हैं। फैकल्टी के जरिए भी अप्लाई कर सकते हैं। इसके लिए एक ऑनलाइन पोर्टल बनाया गया है। जहां छात्र रिसर्च इंटर्नशिप के लिए रजिस्ट्रेशन करा सकेंगे।
छात्रों को मिलेंगी ये सुविधाएं
नई गाइडलाइन में छात्रों के पास मल्टीपल एंट्री और एग्जिट का मौका होगा। छात्रों को अपने कोर्स को बीच में छोड़ने और वहीं से दोबारा शुरू करने की सुविधा मिलेगी। इसके लिए इंटर्नशिप करना जरूरी होगा। इसकी समय सीमा कोर्स की अवधि के अनुसार तय की गई है। हर साल की इंटर्नशिप के लिए 10 क्रेडिट पॉइंट्स मिलेंगे। मतलब 4 साल के यूजी प्रोग्राम के लिए 40 क्रेडिट पॉइंट्स हासिल करना जरूरी होगा।