सुप्रीम कोर्ट (SC) ने सोमवार को कहा कि कोई भी कर्मचारी (Employee) कंपनी को ऐसी गलत जानकारी (False Information) देता है, जिसका सीधा असर उसके पद पर पड़ता है, तो कंपनी उसे बर्खास्त कर सकती है। शीर्ष अदालत ने खास तौर से पुलिस फोर्स में भर्ती के मामले में कानून के सिद्धांतों को ध्यान में रखते हुए कहा कि जनता के विश्वास को प्रेरित करने की उनकी क्षमता समाज की सुरक्षा के लिए एक कवच है।
SC ने कहा कि ऐसे मामले में भी, जहां कर्मचारी ने खत्म हुए आपराधिक मामले की सही और सच्ची घोषणा की है, तब भी कंपनी को उसके पिछले रिकॉर्ड खंगालने का पूरा हक है। साथ ही उम्मीदवार को नियुक्त करने के लिए मजबूर भी नहीं किया जा सकता है।
इसमें कहा गया है कि वेरिफिकेशन फॉर्म में किसी कर्मचारी को अभियोजन/दोषी ठहराने आदि से जुड़ी जानकारी देने की जरूर का मकसद, ये है कि उस शख्स को किसी भी नौकरी या सर्विस पर रखने से पहले उसके चरित्र और पिछले रिकॉर्ड का सही से आकलन किया जा सके।
शीर्ष अदालत ने कहा कि अभियोजन और दोषो ठहराए जाने से जुड़े सवालों के जवाब में अहम जानकारी को छिपाने और गलत बयान देने से कर्मचारी के चरित्र और आचरण पर सीधा असर पड़ता है।
जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस जेबी पारदीवाला की बेंच ने कहा कि "यदि यह पाया जाता है कि कर्मचारी ने कोई ऐसी गलत जानकारी दी है, जो उस पद के लिए उसकी पात्रता या फिटनेस पर असर डाल सकती है, तो उसे सेवा से बर्खास्त किया जा सकता है।"
इसने कहा कि बिना किसी जांच के प्रोबेशन पीरियड के दौरान कर्मचारी की सेवा समाप्त करने के लिए भी यही दिशानिर्देश लागू होंगे।
शीर्ष अदालत ने दो CRPF कर्मियों की दो अलग-अलग अपीलों को खारिज कर दिया, जिन्होंने मटेरियल इंफॉर्मेशन को छुपाया है और अभियोजन से जुड़े सावालों के संबंध में गलत बयान दिया है। शीर्ष अदालत ने कानून के व्यापक सिद्धांत भी तय किए, जिन्हें वर्तमान प्रकृति के मुकदमों पर लागू किया जाना चाहिए।