प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने अमेरिकी एजेंसी फेडरल ब्यूरो ऑफ इंवेस्टिगेशन (FBI) से मिले इनपुट के आधार पर एक संयुक्त अंतरराष्ट्रीय ऑपरेशन में डिजिटल करेंसी में 3,000 करोड़ रुपये के घोटाले का खुलासा किया है। एजेंसी ने 26 अप्रैल को की गई छापेमारी के बाद 27 अप्रैल को उत्तराखंड के हलद्वानी से परविंदर सिंह नामक व्यक्ति को गिरफ्तार किया। सूत्रों ने कहा कि मामले के संबंध में एफबीआई की एक विशेष टीम भी भारत में है।
एफबीआई के जरिए ऑपरेशन की जांच शुरू करने और भारत से लिंक मिलने के बाद ईडी ने जांच शुरू की। मामले की कार्यप्रणाली में नशीली दवाओं के कारोबार से मिले पैसे की अवैध इनकम का उपयोग शामिल है, जिसे डिजिटल करेंसी में बदला गया और भारत के बाहर भेजा गया। अमेरिकी एफबीआई पहले ही 1,500 करोड़ रुपये की डिजिटल मुद्रा संपत्ति जब्त कर चुकी है।
यह सीमा पार अपराध के मामलों में से एक है जहां अंतरराष्ट्रीय एजेंसियों ने मनी लॉन्ड्रिंग सिंडिकेट को प्रभावी ढंग से खत्म करने के लिए समन्वय में काम किया है। ऊपर बताए गए लोगों ने बताया कि शुक्रवार को की गई छापेमारी के दौरान ईडी ने मामले से जुड़े कई महत्वपूर्ण दस्तावेज बरामद किए और FBI के साथ भी जानकारी साझा की जा रही है। हालांकि, इस मामले में एक और आरोपी है जो ईडी की जांच के मुताबिक फरार है।
यह मामला महत्वपूर्ण है क्योंकि गलत काम करने वालों ने जांच एजेंसियों के रडार से बाहर रहने के लिए डिजिटल मुद्राओं और सीमा पार से पैसे की हेराफेरी करना शुरू कर दिया है। केंद्र सीमा पार वित्तीय अपराध पर अंकुश लगाने की दिशा में वैश्विक प्रवर्तन एजेंसियों के साथ सक्रिय रूप से काम कर रहा है।
भारतीय प्रवर्तन एजेंसियां मनी लॉन्ड्रिंग, राउंड-ट्रिपिंग और टैक्स चोरी से जुड़े मामलों में विभिन्न अंतरराष्ट्रीय एजेंसियों के साथ मिलकर काम कर रही हैं। ऐसे कुछ मामलों में, एजेंसियों ने यह भी देखा है कि अपराध की इनकम को क्रिप्टोकरेंसी में परिवर्तित किया जा रहा है, जिसे विभिन्न भौगोलिक क्षेत्रों में ले जाया गया है।