बिहार की फिल्म ऑस्कर में मचा रही धमाल, ऐसे बनी लाल रंजन की ‘चंपारण मटन’

'चंपारण मटन' यूएस, ऑस्ट्रेलिया, फ्रांस समेत कई देशों के बीच भारत से अकेली ऐसी फिल्म है जो स्टूडेंट अकादमी अवार्ड के सेमीफाइनल में पहुंची है। इस अवार्ड के लिए कई देशों से 1700 से अधिक फिल्मों का नॉमिनेशन हुआ था और भारत से चंपारण मटन ने सेमीफाइनल में जगह हासिल की है। फिल्म में चंदन राय मुख्य भूमिका में है साथ ही मुजफ्फरपुर की फलक की एक्टिंग की भी सभी तारीफ करते नजर आ रहे हैं।

अपडेटेड Aug 02, 2023 पर 2:27 PM
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लाल रंजन ने पूरी फिल्म की कहानी अपने ननिहाल पर केंद्रित रखी है।

बिहार के वैशाली के लाल रंजन कुमार कीचंपारण मटनइन दिनों ऑस्कर में छाई हुई है। चंपारण मटन ने नैरेटिव कैटेगरी में अपनी जगह बनाई है। फिल्म ऑस्कर के स्टूडेंट एकेडमी अवार्ड 2023  के सेमीफाइनल में में सिलेक्ट हुई है। इस फिल्म का लेखन और निर्देशन लाल रंजन कुमार ने किया है। अवार्ड के लिए तकरीबन 600 से ज्यादा क़लेजों ने पार्टिसिपेट किया था। 200 देशों से तकरीबन 2400 से भी ज्यादा फिल्में शामिल की गई थीं। वहीं सेमीफाइनल में सिर्फ 63 फिल्में ही पहुंच पाईं जिनमें से एक चंपारण मटन है। वहीं नैरेटिव कैटेगरी में सिर्फ 17 फिल्में ही सिलेक्ट हुई हैं।

फिल्म के लिए साथ आई एक बेहतरीन टीम

फिल्म का प्रोडक्शन डिजाइन मुजफ्फरपुर की मीनाक्षी श्रीवास्तव ने, महाराष्ट्र के शुभम घाटगे ने साउंड डिजाइनिंग और साउंड रिकॉर्डिंग का काम किया है। इस फिल्म की सारी शूटिंग बारामती में की गई है। लाल रंजन ने पूरी फिल्म की कहानी अपने ननिहाल पर केंद्रित रखी।फिल्म में मटन का रिश्तों और त्योहारों से संबंध  दिखाया गया है। कहानी एक परिवार की है जिसमें एक युवा लॉकडाउन में अपनी नौकरी खो बैठता है। फिर ऐसी स्थिति बनती है कि वो अपने परिवार के लिए मटन भी नहीं ला पाता है। व्यंग्य और इमोशंस से सारी स्थितियों को कंबाइन कर कहानी बुनी गई है।

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एक्टिंग से जीता दुनियावालों का दिल

फिल्म में मुख्य किरदारों में चंदन राय दिखाई देते हैं। इसके अलावा फलख खान भी इसमें अहम किरदार में नजर आती हैं। लाल रंजन ने कहानी लिखने के लिए बहुत स्ट्रगल किया। शुरू में उन्हें कहानी लिखनी नहीं आती थी ऐसे में कवि सम्मेलनों में जाते और लोगों से सीखते। एक बार मुलाकात ऊषा किरण से हुई जिन्होंने कहा कि लिखने से ज्यादा पढ़ा करो। बस वहींमूलमंत्री रंजन को ऑस्कर तक ले आया। उन्होंने मुशी प्रेमचंद की कहानियों से ग्रामीण परिवेश और लोगों के स्ट्रगल्स को और गहराई से समझा।


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