Gangubai Kathiawadi Review: संजय लीला भंसाली के बारे में मुझे जो पसंद है, वह यह है कि वह त्रुटिपूर्ण कैरेक्टर्स के चैंपियन हैं। उनकी फिल्में चरम व्यक्तित्वों द्वारा संचालित होती हैं जो संदेह, भय, वासना और लालच से ग्रस्त होती हैं। पद्मावत में अलाउद्दीन खिलजी या बाजीराव मस्तानी में मस्तानी या ब्लैक में मिशेल मैकनली या देवदास में देवदास मुखर्जी इसके प्रमुख उदाहरण हैं।
संजय लीला भंसाली की ये खूबियां आलिया भट्ट (Alia Bhatt) की मच अवेटेड फिल्म गंगूबाई काठियावाड़ी (Gangubai Kathiawadi) में दिखाई दी है। ये फिल्म मशहूर लेखक हुसैन जैदी की किताब माफिया क्वीन्स ऑफ मुंबई (Mafia Queens of Mumbai) पर आधारित है।
फिल्म में वेश्यावृत्ति के जरिए एक गंभीर मुद्दे को सरलता के साथ रखा गया है जो वाकई काबिले तारीफ है। गंगूबाई काठियावाड़ी की कहानी हीरोइन बनने का ख्वाब लेकर अपने वकील पिता का घर छोड़कर निकली किशोरी के बड़े होकर मुंबई में वेश्यावृत्ति के सबसे बड़े इलाके कमाठीपुरा की महारानी बनने की है।
फिल्म की कहानी काफी रोचक है। इसके सभी किरदार दिलचस्प हैं। 'गंगा हरजीवन दास' गुजरात के 'काठियावाड़' की एक ऐसी होनहार युवा लड़की की कहानी है जो समाज से अपने हक के लिए खुद अपनी लड़ाई लड़ती है, जिसने अपनी जिंदगी में क्या कुछ नहीं देखा, क्या कुछ नहीं सहा... लेकिन अभी हार नहीं मानी।
फिल्म की शुरुआत में गंगूबाई कहती है, "कहते हैं कमाठीपुरा में कभी अमावस की रात नहीं होती, क्योंकि वहा गंगू रहती है! और गंगू चांद थी और चांद रहेगी।" फिल्म में आलिया भट्ट के हर डायलॉग्स पर दर्शक तालियां बजाने को मजबूर हो जाएंगे।
आलिया के लिए इस फिल्म में राजी जैसा स्कोप था, जिसका वो सही इस्तेमाल कर पाने में कामयाब रही हैं। उन्होंने गंगूबाई के किरदार को जीने में कोई कोर कसर नहीं छोड़ी है। ये कहना गलत नहीं होगा कि फिल्म को देखने के बाद अगर कभी गंगूबाई काठियावाड़ी का जिक्र आता है तो आपके जेहन में आलिया भट्ट की तस्वीर जरूर उभर आएगी।
फिल्म में विजय राज और शांतनु महेश्वरी की भी जमकर तारीफ हो रही हैं। गंगूबाई काठियावाड़ी में शांतनु को कम स्क्रीन स्पेस ही मिला है लेकिन उन्होंने फिल्म में अपने करिदार के जरिए जान भर दी है। विजय राज ने फिल्म में रजिया की भूमिका निभाई है। इस भूमिका को निभाना जितना मुश्किल है उन्होंने उसे उतने ही सहज तरीके से दर्शकों के सामने परोसा है।