Kathal Film Review: हंसाती, गुदगुदाती फिल्म की कहानी समाज पर करती है गहरे कटाक्ष, जानिए इस 'कटहल' को ढूंढ पाना है कितना मुश्किल

Kathal Review: 'कटहल' सिर्फ एक कॉमेडी फिल्म ना होकर गागर में सागर भरने वाली फिल्म है। इस फिल्म में हर तबके की परेशानियों को दिखाने की कोशिश की है। विधायक, पुलिस, आम आदमी हर तबके की परेशानियों के रंग-बिरंगे इंद्रधनुष बनी है कटहल। यहां आप नियम-कानूनों के चक्रव्यूह से निकलकर न्याय तक पहुंचने के सफर को एन्जॉय करेंगे

अपडेटेड May 22, 2023 पर 11:15 AM
Kathal में सान्या मल्होत्रा ने निभाया है एक महिला इंस्पेक्टर का किरदार

Kathal Film Released:कटहलवैसे तो भारतीय घरों में बड़े चाव से खाया जाता है और खिलाया जाता है। पहली बार कटहल को किचन से निकलकर पुलिस स्टेशन की फाइलों में दर्ज होने का सौभाग्य प्राप्त हुआ है।कहानी में कटहल नया है बाकि मर्म वही है समाज के नंगेपन को दिखाना। चाहे 'पीपली लाइव' हो या 'ऑफिस ऑफिस' इस तरह की फिल्में दिमाग से ज्यादा दिल को छूती हैं। बात आती है कि ऐसा क्या है इस कटहल में जो पूरी पुलिस फोर्स इसके पीछे तैनात कर दी गई है। आइए आपको हम नमक-मिर्च और मसालों के साथ परोसते हैं कटहल’ की कहानी-

फिल्म में अंकल हॉन्ग प्रजाति के दो कटहल चोरी हो जाते हैं। ये कटहल महज कटहल नहीं है ये एक विधायक के मंत्री बनने का टिकट थे। अब शक के घेरे में घर के नौकरों से लेकर दामाद तक सब आ जाते हैं। हालांकि शक जाता है दो दिन पहले निकाले गए माली पर।  फिल्म देखकर आप जान जाएंगे कि माली अगर गुनहगार है तो पकड़ा कैसे जाएगा और अगर बेगुनाह है तो बचेगा कैसे। कटहल’ की इस खिचड़ी के बीच में एक प्यारी सी लव स्टोरी भी पक रही है। एक इंस्पेक्टर और कांस्टेबल की लव स्टोरी। फर्क इतना है कि लड़की ऊंचे पद पर है और लड़का छोटे पद पर।

महिलाओं की समाज में स्थिति

फिल्म महिलाओं की समाज में स्थिति, जातिवाद और पावर के गलत इस्तेमाल को दिखाती है। फिल्म पुलिस जैसे पेशे में एक महिला के आने से आए बदलावों को भी दिखाती है। बीच में हंसाती-गुदगुदाती और रुलाती ये फिल्म अंत में प्रियदर्शन की फिल्मों के जैसी हो जाती है। जहां कौन-किसके पीछे पड़ा है और किसे-किससे बचना है समझ ही नहीं आता। हालांकि अंत में जीत न्याय की होती है।

किरदारों ने जीता दिल

फिल्म में सान्या मल्होत्रा, विजय राज, राजपाल यादव आपको हंसाते गुदगुदाते दिखाई देंगे। राजपाल यादव इस बार काफी हटकर अवतार में नजर आए। वहीं विजय राज ने एक स्थानीय एमएलए के भौकाल को एकदम टाइट करके रखा है।कटहल’ की कहानी मोबा से शुरू होती है जहां की इंस्पेक्टर महिमा यानि सान्या मल्होत्रा एक छोटी जाति से संबंध रखती हैं। वो भले ही पढ़ी लिखी हों ऊंचे पद पर हों लेकिन समाज ये अभी तक नहीं भूला कि वो छोटी जाति से आती हैं।


खुले दिमाग से देखें फिल्म

फिल्म कई पहलुओं पर कटाक्ष करने के अलावा पुलिस व्यवस्था में शामिल कुछ बिदुओं को भी कुरेदती है। एक पुलिसवाला जिसकी खुद की गाड़ी चोरी हो गई है वो कितना लाचार है। जिसे दहेज देने से सबको रोकना चाहिए वही पुलिसवाला खुद दहेज के आगे मजबूर है। कटहल देखने के लिए खुला दिमाग होना जरूरी है ताकि एक दर्शक के तौर पर आप हर एक कैरेक्टर से कनेक्ट कर पाएं।

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