Sukhee Film review: शिल्पा शेट्टी (shilpa shetty) स्टारर फिल्म सुखी 22 सितंबर को रिलीज हो गई है। शुक्रवार को यह फिल्म सिनेमाघरों में रिलीज हो गई है। सुखी मिडिल क्साल हाउसवाइफ की कहानी है। अक्सर ही हम अपने आस पास ऐसा देखते हैं कि महिलाओं की शादी के बाद उनकी जिंदगी उनके परिवार यानी पति और बच्चों के इर्द गिर्द ही घूमने लगती है। परिवार की जिम्मेदारियों में ही उलझी हुई महिलाओं अपने सपनों से समझैता करके अपनी जिंदगी को जीती हैं। सुखी ऐसी ही महिलाओं की कहानी है। ऐसे में आइये जान लेते हैं कि आखिर यह फिल्म कैसी है और क्या आप इस वीकेंड आप इसे सिनेमाघरों में जाकर देख सकते हैं या नहीं।
फिल्म की नायिका सुखी का मनना है कि महिलाओं को बेधड़क, बेशरम और बेपरवाह होना चाहिए। हालांकि इस सिद्धांत को मानने और उनको असल जिंदगी में फॉलो करने के लिए महिलाओं को काफी संघर्ष भी करना पड़ता है। कई बार महिलाएं ऐसे मोड़ पर होती हैं कि वे कुल कर जी सकें। पर फिर वे ऐसा नहीं कर पाती हैं। सुखी में एक महिला अपनी खोई हुई जिंदगी को फिर से वापस खोजने की कहानी को दिखाती है। यही बात इस फिल्म को काफी असरदार भी बनाती है। यह कहानी महिलावाद यानी फेमिनिज्म और सेल्फ लव यानी खुद से प्यार के बीच की कहानी है।
सुखी का डायरेक्शन किया है सोनल जोशी ने। वहीं इस फिल्म में शिल्पा शेट्टी और अमित साथ मेन रोल में हैं। साथ ही फिल्म में फेमस यूट्यूबर कुशा कपिला भी हैं। सुखी में शिल्पा शेट्टी ने सुखप्रीत का किरदार निभाया है। उसे सब सुखी नाम से बुलाते हैं। वहीं सुखी के पति का किरदार अमित साध ने निभाया है। सुखी में एक गृहणी, उसकी बेटी, एक डॉमिनेटिंग हसबैंड और एक बीमार ससुर वाले परिवार की कहानी को बेहद ही मनोरंजक तरीके से दिखाने की कोशिश की गई है। शिल्पा शेट्टी ने इस किरदार को काफी सहजता के साथ निभाया है। वहीं अमित साथ ने भी अपना काम काफी बेहतर तरीके से किया है। वहीं कुशा कपिला ने शिल्पा शेट्टी के दोस्त की भूमिका निभाई है। फिल्म में सुखी की जिंदगी में टर्निंग प्वाइंट तब आता है जब वो अपने कॉलेज के दोस्तों के साथ एक रियूनियन में शामिल होती है।
सिनेमाई लिहाज से देखा जाए तो सुखी की कहानी काफी हल्की और अच्छे तरीके से बुनी गई है। सोनल जोशी ने इसे काफी सही तरीके से पर्दे पर उतारा भी है। फिल्म में एक मिहला के मन में चलने वाले द्वंद को भी काफी सही तरीके से पर्दे पर उतारने की कोशिश की गई है। फिल्म एक ऐसी लड़की की कहानी बताती है कि जिसने अपने माता पिता की मर्जी के खिलाफ जाकर शादी की। अपनी जिंदगी को अपने परिवार पति और बच्चों की देखभाल में लगा दिया। पर जब वो अपने कॉलेज के दोस्तों के साथ रियूनियन में जाना चाहती है तो उसे सेलफिश समझ लिया जाता है। हालांकि सुखी अपने दोस्तों के साथ ट्रिप पर जाती है। उसके बाद सुखी का परिवार किन परेशानियों का सामना करता है यही फिल्म की कहानी है।
क्या है इस फिल्म की कमजोर कड़ी
कई मौकों पर सुखी की काहनी आपको थोड़ा सा कंफ्यूजिंग सी लग सकती है। आप समझ ही नहीं पाएंगे कि आखिर यह फिल्म कहना क्या चाहती है। आपको लगेगा कि यह फिल्म एक शादीशुदा कपल की कहानी है। फिर अगले ही पल आप सोचने लगेंगे कि यह एक हाउसवाइफ की कहानी है। साथ ही इस फिल्म में कई बार जबरन कॉमेडी करने की फील भी आपको आती रहेगी। हालांकि सोनल जोशी ने एक महिला की कहानी को इमानदार तरीके से पर्दे पर उतारने की कोशिश की है। हमारी तरफ से इस फिल्म को तीन स्टार।