The Kerala Story Row: फिल्म ‘द केरल स्टोरी (The Kerala Story)’ को लेकर जारी विवाद के बीच मशहूर संगीतकार ए.आर. रहमान ने गुरुवार को सोशल मीडिया पर एक वीडियो शेयर किया, जिसमें एक हिंदू कपल को केरल की एक मस्जिद में शादी करते देखा जा सकता है। वीडियो शेयर करते हुए रहमान ने लिखा, "मानवता के लिए प्रेम बिना शर्त होना चाहिए।" वीडियो में एक कपल मस्जिद में सात फेरे लेता नजर आ रहा है।
ऑस्कर पुरस्कार विजेता संगीतकार ने जिस वीडियो को शेयर किया उसका कैप्शन लिखा है, ‘एक और केरल स्टोरी।’ डिजिटल प्लेटफॉर्म ‘द न्यूज मिनट’ द्वारा तैयार लगभग दो मिनट की वीडियो में केरल के अलप्पुझा शहर की मस्जिद में एक हिंदू कपल को शादी के बंधन में बंधते हुए दिखाया गया है।
वीडियो के मुताबिक, आर्थिक तंगी से जूझ रही दुल्हन की मां ने अपनी बेटी की शादी में मदद के लिए मस्जिद की समिति से संपर्क किया था। बता दें कि 'द केरल स्टोरी' विवादों के बीच सिनेमाघरों में रिलीज हो चुकी है। फिल्म आज यानी पांच मई को सिनेमाघरों में रिलीज हुई।
द हिंदू की रिपोर्ट के मुताबिक, एआर रहमान ने जो वीडियो शेयर किया है, ये वीडियो 19 जनवरी, 2020 का है। जिसमें एक कपल कायमकुलम में स्थित चेरावली जमात मस्जिद के अंदर हिंदू रीति-रिवाज से शादी करते दिख रहे हैं। माना जा रहा है कि रहमान ने केरल की ताकत को इस वीडियो में बयां किया हैं। जहां ऐसे प्यार और सद्भावना के कई उदाहरण मौजूद हैं।
'द केरल स्टोरी' फिल्म केरल में हिंदू महिलाओं को इस्लाम में धर्मांतरित कर उन्हें आतंकवादी इस्लामिक स्टेट ऑफ इराक एंड सीरिया (ISIS) में शामिल किए जाने के आरोपों पर आधारित है। रहमान से पहले हाल में ही तिरुवनंतपुरम से कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने भी फिल्म की आलोचना करते हुए कहा था कि 'द केरल स्टोरी' अतिश्योतिक्ति करती है। राज्य की सच्चाई इतनी भर नहीं है।
केरल HC ने फिल्म की रिलीज पर रोक लगाने से किया इनकार
विवाद के बीच केरल हाई कोर्ट ने शुक्रवार को 'द केरल स्टोरी' फिल्म की रिलीज पर रोक लगाने से इनकार कर दिया। फिल्म का टीजर और ट्रेलर देखने के बाद जस्टिस एन नागरेश और सोफी थॉमस की खंडपीठ ने कहा कि इसमें इस्लाम या मुसलमानों के खिलाफ कुछ भी नहीं है, लेकिन इस्लामिक स्टेट ऑफ इराक एंड सीरिया (ISIS) के बारे में है। बार एंड बेंच के मुताबिक, पीठ ने कहा, "इस्लाम के खिलाफ क्या है? धर्म के खिलाफ कोई आरोप नहीं है। आरोप आईएसआईएस के खिलाफ है।"
अदालत ने अपने आदेश में कहा कि फिल्म के ट्रेलर के माध्यम से हम पाते हैं कि इसमें किसी विशेष समुदाय के लिए कुछ भी आपत्तिजनक नहीं है। किसी भी याचिकाकर्ता ने फिल्म नहीं देखी है। पीठ ने मौखिक रूप से टिप्पणी करते हुए कहा कि ऐसी कई फिल्में हैं जिनमें हिंदू सन्यासियों को तस्कर या बलात्कारी के रूप में दिखाया गया है लेकिन इसका कोई प्रतिकूल परिणाम नहीं हुआ है।