आज हम यहां होम्योपैथी की दवा की बात कर रहे हैं। होम्योपैथी की दवा हम सभी ने कभी न कभी अपने जीवन में खाई है। अक्सर होम्योपैथी की सफेद मीठी गोलियों को लेकर मजाक भी करते हैं। वहीं, कुछ लोग इसमें बहुत ज्यादा विश्वास करते हैं। आज तक होम्योपैथी को लेकर बहुत लोगों के दिमाग में प्रश्न बने ही रहते हैं। लोग होम्योपैथी को एक अल्टरनेटिव थेरेपी के रूप में देखते हैं। लेकिन क्या होम्यो पैथी एक कम्प्लीट थेरेपी है इस पर चर्चा के लिए आज साथ दे रहे हैं होम्योपैथी के दो बड़े डॉक्टर, लखनऊ से डॉ उमंग खन्ना और दिल्ली से डॉ बेला चौधरी। इनसे बात करने के पहले होमियो पैथी के बारे में जान लेते हैं कुछ खास बातें।
होम्योपैथी की दवा कितनी असरदार है, होम्योपैथी बनाम एलोपैथी
गौरतलब है कि 2 साल से कम के बच्चों पर तेलंगाना में हुए रिसर्च से खुलासा हुआ है कि सामान्य बीमारियों में होम्योपैथी बेहतर साबित होती है। फीवर और डायरिया जैसे ट्रीटमेंट में होम्योपैथी काफी कारगर है। इस रिसर्च में शामिल होम्योपैथी ग्रुप के बच्चे कम बीमार हुए हैं। यूरोपियन जर्नल ऑफ पीडियाट्रिक्स की रिपोर्ट में ये बातें प्रकाशित हुई हैं।
जर्मन फिजिशियन हनीमैन ने होम्योपैथी की शुरूआत की थी। इसमें सिमटम पैदा करने वाले सब्सटांस से इलाज होता है। इसमें इम्युनिटी को स्टिम्युलेट करके इलाज किया जाता है। वैज्ञानिक मान्यता नहीं मिलने से होम्योपैथी पिछड़ गई है। कई देशों ने इसे मान्यता देना बंद कर दिया है। भारत में होम्योपैथी को सरकारी मान्यता है। अलग कॉलेजों में इसकी पढ़ाई होती है। इसको वैकल्पिक चिकित्सा के तौर पर मान्यता दी गई है।
कहां फायदेमंद होम्योपैथी?
होम्योपैथी एलर्जी, माइग्रेन, डिप्रेशन, क्रोनिक फटीग सिंड्रोम, आर्थराइटिस, प्रीमेंशुरल सिंड्रोम, पाचन तंत्र की दिक्कतें, छोटे मोटे दर्द,, चोट, सर्दी-खांसी और त्वचा के रोगों में कारगर पाई गई है।
आम तौर पर होम्योपैथिक दवाएं सुरक्षित होती हैं। लेकिन गंभीर बीमारी और इमरजेंसी में कारगर नहीं होतीं। अस्थमा, कैंसर और दिल की बीमारी में ये दवाएं रिस्की होती हैं। होम्योपैथी वैक्सीन का विकल्प नहीं है। कुछ होम्योपैथिक दवाओं की पोटेंसी ज्यादा होती है। हेवी मेटल वाली दवाएं रिस्कीहो सकती हैं।
डॉ बेला चौधरी ने कहा कि वे इस रिसर्च के नतीजों के सहमत हैं। डायरिया और बुखार में तो होम्योपैथिक दवाएं, एलोपैथी से भी तेज काम करती हैं। होम्योपैथी एक्यूट डिजीज में बहुत बेहतर तरीके से काम करती है।
डॉ उमंग खन्ना ने कहा कि होम्योपैथी भविष्य का विज्ञान है। यह आयनिक साइंस पर काम करती है। आज ये काफी बेहतर हो चुकी है और आगे और बेहतर होगी। तमाम ऐसी बीमारियां हैं जिनका इलाज होम्योपैथी में ही है। पार्किंसंस, अल्जाइमर जैसे तमाम रोगों का इलाज सिर्फ होम्योपैथी में ही है। दुनिया में तमाम नई-नई बीमारियां आ रही हैं। इनका कारण ही नहीं पता है। जब इनका कारण ही नहीं पता है तो एलोपैथी में इनकी दवाइयां भी नहीं हैं। लेकिन होम्योपैथी में इनका इलाज संभाव होगा। इसकी वजह यह है कि होम्योपैथी कारण नहीं लक्षणों के आधार पर इलाज करती है। ऐसे में होम्योपैथी आने वाले भविष्य की पैथी है। होम्योपैथी सुगम, सरल, परमानेन्ट और इकोनॉमिकल भी है।
डॉ उमंग खन्ना ने आगे कहा कि हर पैथी की अपनी एक लिमिट होती है। होम्योपैथी आयुर्वेद का ही परिष्कृत रूप है। अब होम्योपैथी के डॉक्टर भी पर्चे लिखकर देते हैं। क्योंकि अब भारत ही नहीं पूरी दुनिया में होम्योपैथी की दवाएं मिलती हैं।
डॉ उमंग खन्ना ने आगे कहा कि यह सही है कि होम्योपैथी में सर्जिकल प्रॉसेस नहीं है। हड्डी टूटने पर उसका ऑपरेशन नहीं किया जा सकता लेकिन सर्जन द्वारा ऑपरेशन के बाद की हीलिंग प्रक्रिया होम्योपैथी में ज्यादा बेहतर तरीके से होती है। अगर हड्डी को सर्जन ने बैठा दिया तो होम्योपैथी में ही सिम्फाइटम नाम का दवा है जो हड्डी को दो महीने की जगह 1 महीने में जोड़ देती है। यह दवा कैलस का फॉर्मेशन करके हड्डी को जोड़ती है। होम्योपैथी में ही रूटा नाम की वो दवा है जो हड्डी की ग्राइंडिंग करके उसको बिलकुल नॉर्मल कर देती है।