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'Hop, Skip and Jump': जिस अभियान ने बदली देश की किस्मत, पीछे हटना चाह रहे थे PV, तब मनमोहन ने कहा-अभी नहीं तो कभी नहीं

Manmohan Singh Death News: साल 1991 का दौर ऐसा था, जब देश की आर्थिक बेहद खस्त थी। उस समय मनमोहन सिंह देश के वित्त मंत्री थे। उस समय मनमोहन सिंह ने भारतीय रुपये का 72 घंटों के भीतर दो बार अवमूल्यन किया था। पहला, 1 जुलाई 1991 और दूसरा 3 जुलाई 1991 को। मनमोहन सिंह के मीडिया सलाहकार रहे संजय बारू ने अपनी किताब ऐसे कई मुद्दों का जिक्र किया है

Arun Tiwariअपडेटेड Dec 29, 2024 पर 2:00 PM
'Hop, Skip and Jump': जिस अभियान ने बदली देश की किस्मत, पीछे हटना चाह रहे थे PV, तब मनमोहन ने कहा-अभी नहीं तो कभी नहीं
Manmohan Singh Death News: मनमोहन सिंह 92 वर्ष की आयु में दुनिया को अलविदा कह गए हैं। लेकिन उनके आर्थिक सुधारों के लिए पीढ़ियों तक उन्हें याद रखा जाएगा।

1991 में पीवी नरसिम्हा राव ने 21 जून को देश के 10वें प्रधानमंत्री के रूप में शपथ ली थी। इसके ठीक एक दिन बाद राव ने देश को टेलिविजन पर संबोधित किया था। अपने स्थिर अंदाज में नरसिम्हा राव ने देश के लोगों से कहा-अर्थव्यवस्था संकट में है। भुगतान संतुलन की हालत बहुत खराब है। हमारे पास बर्बाद करने के लिए वक्त नहीं है। कोई भी सरल विकल्प नहीं है। हमें अपनी कमर कस लेनी चाहिए और अपनी आर्थिक आजादी को बचाए रखने के लिए जरूरी बलिदान देने के लिए तैयार हो जाएं।

नरसिम्हा राव देश की खस्ता आर्थिक हालत को ठीक करने के लिए तैयार थे। इस काम के लिए उन्होंने मनमोहन सिंह को चुना था जो सरकार में वित्त मंत्री थे। उस वक्त मनमोहन सिंह ने भारतीय रुपये का 72 घंटों के भीतर दो बार अवमूल्यन किया था। पहला, 1 जुलाई 1991 और दूसरा 3 जुलाई 1991 को। मनमोहन सिंह के मीडिया सलाहकार रहे संजय बारू ने अपनी किताब 1991: HOW PV NARSIMHA RAO MADE HISTORY में लिखा है कि इस पूरी एक्सरसाइज का नाम Hop, Skip and Jump रखा गया था। मनमोहन सिंह के साथ इस काम में भागीदार थे तत्कालीन आरबीआई डिप्टी गवर्नर सी. रंगराजन।

पहले स्टेप के बाद रुके थे पीवी के पांव

बारू ने किताब में लिखा है-एक जुलाई को पहले स्टेप के बाद पीवी के पांव थोड़ा रुके थे क्योंकि अवमूल्यन भारतीय राजनीति में एक बुरा शब्द था! पीवी 1966 में हुए अवमूल्यन के बारे में जानते थे, तब प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की काफी आलोचना हुई थी। उस वक्त इंदिरा गांधी ने प्रधानमंत्री कार्यालय और वित्त मंत्रालय के अधिकारियों को ताकीद की थी वो राज्य के मुख्यमंत्रियों को भी इस निर्णय के बारे में जानकारी दें। मुद्रा का अवमूल्यन सिर्फ आर्थिक निर्णय नहीं था बल्कि एक राजनीतिक निर्णय भी था।

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